न्यू मीडिया में हिन्दी भाषा, साहित्य एवं शोध को समर्पित अव्यावसायिक अकादमिक अभिक्रम

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

सृजन ऑस्ट्रेलिया | SRIJAN AUSTRALIA

6 मैपलटन वे, टारनेट, विक्टोरिया, ऑस्ट्रेलिया से प्रकाशित, विशेषज्ञों द्वारा समीक्षित, बहुविषयक अंतर्राष्ट्रीय ई-पत्रिका

A Multidisciplinary Peer Reviewed International E-Journal Published from 6 Mapleton Way, Tarneit, Victoria, Australia

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं
प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

श्रीमती पूनम चतुर्वेदी शुक्ला

सुप्रसिद्ध चित्रकार, समाजसेवी एवं
मुख्य संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

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थर्ड जेंडर

  तुम क्या कहोगे मुझे?  पहचान के लिए एक अदना सा शब्द तो दे ना सके और दे भी क्या सकते हो तुम  मैं क्यों मांगू नाम थोड़े ही मांगा

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सौ सौ अफसाने हैं

नवगीत सबका अपना तौर-तरीकासबके अपने पैमाने हैं। हैं कई सभ्यताएँऔर उनमें संघर्ष है।कैसे होगा फिरइंसानियत का उत्कर्ष है।। अगर हमारा पंथ निरालाउसके सौ-सौ अफसाने हैं। एकीकृत करने का अबकोई वक्त

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अफलातून लगा है

22 22 22 22ग़ज़ल वह तो अफलातून लगा है।पशुता गर नाखून लगा है।। भ्रष्टाचार बढ़ाने वाले,उनके मुँह में खून लगा है। जाड़े के दिन पाँव पसारे,यानि सलाई-ऊन लगा है। सोच-विचार

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अफलातून लगा है

22 22 22 22ग़ज़ल वह तो अफलातून लगा है।पशुता गर नाखून लगा है।। भ्रष्टाचार बढ़ाने वाले,उनके मुँह में खून लगा है। जाड़े के दिन पाँव पसारे,यानि सलाई-ऊन लगा है। सोच-विचार

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पुस्तक समीक्षा
srijanaustralia

अतीत से वर्तमान : नवगीत वाङ्मय

इक्कीसवीं सदी में देखा गया है कि लगभग हर दो-तीन वर्ष में नवगीत के संकलन प्रकाशित हो रहे हैं, जिनमें कुछ वृहद संकलन हैं, तो कुछ संक्षिप्त हैं। इन संकलनों

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जैसे हबूब गया

  नवगीत-जैसे हबूब गया   सूरज निकला सुबह-सुबह शाम को डूब गया।   किरणों ने  दुनिया में धूप की चादर फैलाई। संगीत फूटा  निर्झर से कल-कल की ध्वनि आई।।  

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यातायात

  यातायात-नवगीत   यातायात मन में दु:ख-विषाद का चल रहा है।   जगह-जगह हो रही दुर्घटना है। हो चाहे भोपाल या पटना है।।   हैं कैसा समय चाँदनी का रूप

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शोध पत्र
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मीना कुमारी नाज़ की शायरी

मीना कुमारी नाज़ की शायरीडॉ. वसीम अनवर सहायक प्राध्यापक उर्दू  एवं फारसी विभाग डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय,  सागर, मध्य प्रदेश wsmnwr@gmail.com; 9301316075             मीना कुमारी को एक अव़्वल दर्जा की

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हाईकु
rnbanyala

हाइकु

माँ हो कर ही जाना जा सकता है माँ का होना भी ।   काँधे पे पेट सिर पर गठरी कोरोना यात्रा ।   धूप से लड़े हमको छाया देने

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कस्तूरी

कस्तूरी मेरी ‘कस्तूरी’ मुझे देती रही भटकन ……… उम्रभर जो मरा तो जाना कि मारा भी गया इसी के लिए । Last Updated on September 20, 2021 by rnbanyala

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अभिषेक करें जनवाणी का

अभिषेक करें जन वाणी का ================   अभिषेक करें जन वाणी का   नागरी का, दीव्यागीर्वाणी का   ओंकार जन्मा, संस्कृत सृष्टा   जग वन्दिनी, देव–नन्दिनी   खलिहान–खनक, मात वाणी

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पुस्तक समीक्षा
srijanaustralia

श्रेष्ठ इक्यावन कविताएँ : हिन्दी कविता का वैश्विक प्रतिबिम्ब – डॉ सम्राट् सुधा

भारत -रत्न , पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय श्री अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मदिवस पर गत वर्ष आयोजित अंतरराष्ट्रीय अटल काव्य- लेखन प्रतियोगिता में चयनित 51 कविताओं का संग्रह ‘श्रेष्ठ इक्यावन कविताएं’

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संस्मरण
sumajithkumar

रज्जो /RAJJO

                        रज्जो  रात के दस बज रहे होंगे। कॉलनी के गेट से होकर आ रही मिलिट्री हॉस्पिटल की वैन देखकर हैरान रह गयी | इस समय कौन सी इमरजेंसी है

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नदी के साथ

मैं इस नदी के साथ,जीना चाहता हूँ..डूबना चाहता हूँ..इसके भीतर!!तैर कर सभी.. पार कर लेते हैं नदियाँ।नाव पर घूमते हुए..देखते हैं सभी।मैं डूब कर भीतर तकदेखना चाहता हूँ भीतर से

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अनूदित लेख
gorakhpuriyalegend

किसान

सभी व्यवसायी चाहते हैं, उनका बेटा बड़ा होकर यदि कुछ नहीं तो उनका ही रोज़गार संभाले। परन्तु एक किसान कभी स्वप्न में भी नहीं सोचता कि उनका बेटा बड़ा होकर

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अनूदित समीक्षा
gorakhpuriyalegend

प्रेम

प्रेम… ये वो प्यारा नाम है जो प्यार, स्नेह, मोह, प्रीत, आनन्द, हर्ष का एक अद्भुत संयोग है। जो ह्रदय में ममत्व की भावनाओं को उत्पन्न करता हैं। जहाँ इसमें,

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अनूदित कविता
gorakhpuriyalegend

लड़के जब रोतें हैं

लड़के जब रोते हैं,प्रकृति में असंतुलन बढ़ जाता है। सूर्य अपने तीव्र वेग पर आ जाते हैं। समंदर में वाष्पोत्सर्जन चरम पर होता है। पृथ्वी का जलस्तर तेजी से घटता

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अनूदित कविता
gorakhpuriyalegend

तुम्हारा सौंदर्य

अत्यंत कठिन है तुम्हारे सौंदर्य का वर्णन तुम्हारे सौंदर्य को देखना ठीक वैसा ही है,जैसे बारिश के बाद इंद्रधनुष को ढूंढना!तुम्हारे सुंदरता का उत्कर्ष है तुम्हारे चेहरे की लालिमाजैसे उदय

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Uncategorized
srijanaustralia

अंतरराष्ट्रीय अटल काव्य प्रतियोगिता – 2021

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री एवं सुप्रसिद्ध कवि भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की जयंती 25 दिसंबर 2021 के अवसर पर विश्व हिंदी सचिवालय, मॉरीशस,  न्यू मीडिया सृजन संसार

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लघु कथा
chandresh.chhatlani

शक्तिहीन

वह मीठे पानी की नदी थी। अपने रास्ते पर प्रवाहित होकर दूसरी नदियों की तरह ही वह भी समुद्र से जा मिलती थी। एक बार उस नदी की एक मछली

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नई कविता
sohalgurdeepsingh

मंदिर मस्जिद का बनना

मंदिर मस्जिद का बनना। दुनियां में सरेआम हुआ।। आदमी बन न सका बंदा। रब्ब यूं ही बदनाम हुआ।। जात पांत का चक्कर बड़ा। भक्ति का मार्ग ताम हुआ।। जंगल जंगल

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तोटक छंद “विरह”

तोटक छंद “विरह” सब ओर छटा मनभावन है।अति मौसम आज सुहावन है।।चहुँ ओर नये सब रंग सजे।दृग देख उन्हें सकुचाय लजे।। सखि आज पिया मन माँहि बसे।सब आतुर होयहु अंग

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तिलका छंद “युद्ध”

तिलका छंद “युद्ध” गज अश्व सजे।रण-भेरि बजे।।रथ गर्ज हिले।सब वीर खिले।। ध्वज को फहरा।रथ रौंद धरा।।बढ़ते जब ही।सिमटे सब ही।। बरछे गरजे।सब ही लरजे।।जब बाण चले।धरणी दहले।। नभ नाद छुवा।रण

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*युवाओं के प्रेरणास्रोत स्वामी विवेकानंद जी की पुण्य तिथि पर एक कविता*

*युवाओं के प्रेरणास्रोत स्वामी विवेकानंद*(स्वामी विवेकानंद जी के पुण्यतिथि पर समर्पित)**************************************** रचयिता :*डॉ.विनय कुमार श्रीवास्तव*   12जनवरी1863 कोलकाता धरती महान।जन्मे जहाँ श्री स्वामी विवेकानंद जी महान। कुलीन बंगाली कायस्थ परिवार

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*वैश्विक आध्यात्मिक गुरु-स्वामी विवेकानंद जी की पुण्य तिथि पर एक लेख*

*वैश्विक आध्यात्मिक गुरु-स्वामी विवेकानन्द*(पुण्यात्मा स्वामी विवेकानंद जी की पुण्य तिथि पर एक लेख)****************************************   लेखक : *डॉ.विनय कुमार श्रीवास्तव*वरिष्ठ प्रवक्ता-पी बी कालेज,प्रतापगढ़ सिटी,उ.प्र.   वेद वेदांतों के प्रकाण्ड विद्वान और

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*मुँह नाक में टोपी व वैक्सीन ही है दवाई*

*मुँह नाक में टोपी व वैक्सीन ही है दवाई*************************************** रचयिता : *डॉ.विनय कुमार श्रीवास्तव*वरिष्ठ प्रवक्ता-पी बी कालेज,प्रतापगढ़ सिटी,उ.प्र.   लगाये रखनाअपने मुँह नाक की टोपी।कहें जिसे मास्क भी लाइफ तब

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*स्वर लहरियों का सरगम ही संगीत*

*स्वर लहरियों का सरगम ही संगीत********************************* रचयिता : *डॉ.विनय कुमार श्रीवास्तव*वरिष्ठ प्रवक्ता-पी बी कालेज,प्रतापगढ़ सिटी,उ.प्र.   मन की खिन्नता को ये प्रसन्न करे संगीत।निराशा को आशा में बदलता है संगीत।

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*संस्कार बिना हर शिक्षा बेकार*

*संस्कार बिना हर शिक्षा बेकार******************************* रचयिता : *डॉ.विनय कुमार श्रीवास्तव*वरिष्ठ प्रवक्ता-पी बी कालेज,प्रतापगढ़ सिटी,उ.प्र.   संस्कार एक कला है साथमें व्यक्ति का गहना।जिसमें होता संस्कार भरा उसका क्या कहना। जीवन

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*सर्वश्रेष्ठ हूँ मैं केवल शेष सभी बेकाम*

*सर्वश्रेष्ठ हूँ मैं केवल शेष सभी बेकाम************************************ रचयिता : *डॉ.विनय कुमार श्रीवास्तव*वरिष्ठ प्रवक्ता-पी बी कालेज,प्रतापगढ़ सिटी,उ.प्र.   ये कहना कोई श्रेष्ठ नहीं है,मैं ही हूँ केवल सर्वश्रेष्ठ।बिलकुल गलत धारणा है

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*हिमालयन अपडेट कानपुर-काव्य समीक्षा*

*हिमालयन अपडेट कानपुर-काव्य समीक्षा* **************************************** समीक्षक : *डॉ.विनय कुमार श्रीवास्तव*वरिष्ठ प्रवक्ता-पी बी कालेज,प्रतापगढ़ सिटी,उ.प्र.   कलमकार कोई भी हो वह तो अपनी लेखनी का सदैव ही धनी होता है। कवि

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*बढ़ती उम्र के साथ सुखी रहने को आदतों में बदलाव जरुरी*

*बढ़ती उम्र के साथ सुखी रहने को आदतों में बदलाव जरुरी***************************************** आलेख : *डॉ.विनय कुमार श्रीवास्तव*वरिष्ठ प्रवक्ता-पी बी कालेज,प्रतापगढ़ सिटी,उ.प्र. प्रकृति का यह शाश्वत सत्य नियम है यदि ईश्वर कृपा

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*ईश्वर सब कुछ देख रहा है इसका भी ध्यान रखें*

*ईश्वर सब कुछ देख रहा है इसका भी ज्ञान रखें**************************************** रचयिता : *डॉ.विनय कुमार श्रीवास्तव*वरिष्ठ प्रवक्ता-पी बी कालेज,प्रतापगढ़ सिटी,उ.प्र.   ईश्वर ही की इस जग में सब से बड़ी सत्ता

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*छत्रपति शिवाजी महाराज जयंती विशेष*

*छत्रपति शिवाजी महाराज जयंती विशेष**************************************** रचयिता : *डॉ.विनय कुमार श्रीवास्तव*वरिष्ठ प्रवक्ता-पी बी कालेज,प्रतापगढ़ सिटी,उ.प्र.   छत्रपति शिवाजी महाराज एक बहादुर योद्धा।जन्में यह धरती पर कर्मवीर अविजित योद्धा। पिता शाहजी भोसले

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*हँसी ख़ुशी प्रेम से रहें घर ही स्वर्ग है*

*हँसी ख़ुशी प्रेम से रहें घर ही स्वर्ग है*********************************** रचयिता : *डॉ.विनय कुमार श्रीवास्तव*वरिष्ठ प्रवक्ता-पी बी कालेज,प्रतापगढ़ सिटी,उ.प्र.   बिना कुछ करे ना कभी कुछ मिला है,कर्मों का फल ही

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*वृक्षारोपण जरूर करें ताकि हमें शुद्ध ऑक्सीजन-स्वस्थ जीवन मिले*

आलेख शीर्षक :**************************************************”वृक्षारोपण जरूर करें ताकि हमें शुुद्ध ऑक्सीजन-स्वस्थ जीवन मिले************************************************** लेखक : *डॉ.विनय कुमार श्रीवास्तव*वरिष्ठ प्रवक्ता-पी बी कालेज,प्रतापगढ़ सिटी,उ.प्र. पर्यावण का तात्पर्य हमारे आस पास चारो ओर प्राकृतिक रूप

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*आम का गुड़म्मा*

*आम का गुड़म्मा******************* रचयिता : *डॉ.विनय कुमार श्रीवास्तव*वरिष्ठ प्रवक्ता-पी बी कालेज,प्रतापगढ़ सिटी,उ.प्र.   फलों के राजा आम का मौसम आया।किस किस ने गुड़म्मा बनाया है खाया। खाया नहीं तो मैं

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*महाराणा प्रताप सिंह सिसोदिया जयंती*

*महाराणा प्रताप सिंह सिसोदिया जयंती*************************************** रचयिता : *डॉ.विनय कुमार श्रीवास्तव*वरिष्ठ प्रवक्ता-पी बी कालेज,प्रतापगढ़ सिटी,उ.प्र.   9मई1540सिसोदिया राजपूत वंश में जन्मे।महाराणा प्रताप सिंह सिसोदिया वीर जन्मे। जन्मे जिस पुण्य धरा पर

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*रक्तदान करें एलायन्स क्लब के रक्तवीर बनें*

*रक्तदान करें एलायन्स क्लब के रक्तवीर बनें***************************************** रचयिता : *डॉ.विनय कुमार श्रीवास्तव*वरिष्ठ प्रवक्ता-पी बी कालेज,प्रतापगढ़ सिटी,उ.प्र.   रक्त दान करना जीवन में एक बड़ा है काम।मामूली यह दान नहीं है

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*वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई – बलिदान दिवस*

*वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई – बलिदान दिवस***************************************** रचयिता : *डॉ.विनय कुमार श्रीवास्तव*वरिष्ठ प्रवक्ता-पी बी कालेज,प्रतापगढ़ सिटी,उ.प्र.   रानी लक्ष्मीबाई को उत्सर्ग दिवस पर नमन करें।देकर अपनी श्रद्धांजलि सच्ची कथा श्रवण करें।

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*इंटरनेशनल योगा डे-करें योग-रहें स्वस्थ,निरोग*

*”इंटरनेशनल योगा डे”-करें योग रहें स्वस्थ,निरोग*(अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का शुरुआत व इतिहास)*************************************** रचयिता : *डॉ.विनय कुमार श्रीवास्तव*वरिष्ठ प्रवक्ता-पी बी कालेज,प्रतापगढ़ सिटी,उ.प्र. योग हमारे भारत के ऋषियों मुनियों की देन,हजारों साल

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नई कविता
shubhaagya

रश्मिरथी

जा रे जा,जिया घबराए ऐ लंबी काली यामिनी आ भी जा,देर भई रश्मिरथी मृदुल उषा कामिनी काली घटा घिर घिर आए गरज गरज बदरा हैं छाए जाने क्यों खामोश हवाएं

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मोटनक छन्द “भारत की सेना”

(मोटनक छन्द) सेना अरि की हमला करती।हो व्याकुल माँ सिसकी भरती।।छाते जब बादल संकट के।आगे सब आवत जीवट के।। माँ को निज शीश नवा कर के।माथे रज भारत की धर

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गीतिका छंद “चातक पक्षी”

(गीतिका छंद) मास सावन की छटा सारी दिशा में छा गयी।मेघ छाये हैं गगन में यह धरा हर्षित भयी।।देख मेघों को सभी चातक विहग उल्लास में।बूँद पाने स्वाति की पक्षी

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नई कविता
ddeep935

काश तुम समझ पाते

             “काश तुम समझ पाते”               —————————–              काश तुम समझ पाते मेरे मन

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काव्य धारा
meenakhond

दोस्त

दोस्त अब  मत  सुनाओ हमे  दर्दभरे  अफसाने ।हमने  तो  गमों  से रिश्ता  ही  तोड  दिया । अब  जमाने  की  हमे कोई  परवाह  नही ।हमने  तो  भगवान  कोदोस्त  बना  दिया । भगवान  से  दोस्ती कियी 

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भटकती आत्मा

भटकती आत्मा! चौबीसों घण्टे,नकारात्मकता से युक्तरोज़ाना ख़बरों में कोरोना वायरस के संक्रमण के बढ़ते मामलों और मृत्यु-दर के साथ-साथ असंख्य कहानियों को सुनते-देखते,ज़िंदगी अग्रसर है। मार्च में लॉक-डाउन के बावजूद,तबलीगी

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आलेख
hisarsushil

गधों की चिंता करना छोड़ें, अपने बारे में ही सोचें कुरड़ी पर लौटे बिना, उन्हें स्वाद थोड़े न आएगा..

सुशील कुमार ‘नवीन’ दो दिन पहले सोशल मीडिया पर पढ़े एक प्रसंग ने मन को काफी गुदगुदाया। आप भी जानें कि आखिर उसमें ऐसा क्या था कि उक्त प्रसंग, लेखन

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बाल कहानी
anilkr8888

प्री-बोर्ड

प्री-बोर्ड उर्मिला काफी देर से चम्मच को उल्टा सीधा करके देख रही थी और उसकी माँ सुधा उसे।उर्मिला अमूमन अल्हड़ स्वभाव का वर्ताव किया करती थी और सुधा को उसी

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रोला छंद “शाम’

(रोला छंद) रवि को छिपता देख, शाम ने ली अँगड़ाई।रक्ताम्बर को धार, गगन में सजधज आई।।नृत्य करे उन्मुक्त, तपन को देत विदाई।गा कर स्वागत गीत, करे रजनी अगुवाई।। सांध्य-जलद हो

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काव्य धारा
hindijudwaan

हरिराम भार्गव “हिन्दी जुड़वाँ” की दो कविताएं

1 एक बार तुम नदी बन जाना   बड़ी मासूम हैं  मन की हसरतें कभी कहती नहीं  सुनती भी नहीं पर बयां कर देती है दिल की सारी बातें फिर

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काव्य धारा
mds.jmd

अरमानों की गाँठ

  अरमानों की गाँठ (एक स्त्री का सामाजिक जीवन परिवार की जिम्मेदारियों के सान्निध्य में घिरा होता है, स्त्री अपने पारिवारिक सदस्यों के अरमानों  को सजाने के लिए निस्वार्थ लाभार्थी

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काव्य धारा
mds.jmd

प्रिय मैं तुमसे भिन्न हूँ कहाँ

प्रिय मैं तुमसे भिन्न हूँ कहाँ (प्रत्येक प्रियतमा अपने प्रियतम की छवि होती है, अपने प्रियतम में सागर की जल धारा बनकर संग -संग चलती है, इसी संदर्भ में प्रस्तुत

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काव्य धारा
sandeepk62643

ख़ुद को भी जानो

ख़ुद को भी जानो दुनिया की इस भाग दौड़ में खुद को भी कुछ समय दो ।क्या कर रहे हो क्यों कर रहे हो कैसे जी रहे हो क्या वाकई

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काव्य धारा
mds.jmd

कौन दिसा के वासी तुम?

कौन दिसा के वासी तुम? [प्रियतम के दूर होने से मन की उत्कंठा भिन्न भिन्न रूपों में प्रियतम की कल्पना करता हुआ उदास है अर्थात् जीवन में जीवनसाथी की निकटता

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काव्य धारा
mds.jmd

ईश्वरः एक रूप अनेक …

ईश्वरः एक रूप अनेक … (अध्यात्म में ईश्वर के अनेक स्वरूप है और उन्हीं में ईश्वर का एक रूप कृष्ण के रूप में चर अचर जीव जंतु जड़ चेतन सभी

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काव्य धारा
sandeepk62643

आँगन में खेलते बच्चे

आँगन में खेलते बच्चे आँगन में खेलते रंग-बिरंगे बच्चे,लगते कितने प्यारे कितने अच्छे !फूलों-सी मुस्कान है-चेहरों परऔर आँखों में भरे-सपने सच्चे । खेलते छुपन-छुपाई, पकड़म-पकड़ाई,गोपी चंदर ने इनकी ख़ुशी बढ़ाई;भले

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काव्य धारा
hetrambhargav

माँ- मातृ दिवस पर ब्रह्म रूपी जननी माताओं को समर्पित कविता

    माँ [इस संसार में ब्रह्म का दूसरा स्वरूप स्त्री हैं, स्त्री का माता का स्वरूप स्वयं ब्रह्म हैं। जगत जननी माताओं को समर्पित कविता]          

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देखो मेरे नाम सखी

देखो मेरे नाम सखी “   प्रियतम की चिट्ठी आई है देखो मेरे नाम सखी विरह वेदना अगन प्रेम की लिक्खी मेरे नाम सखी ।   आसमान में काले बादल

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विलुप्ति की कगार पर खड़ी प्राचीन नाट्य परंपरा और हमारी चिंता

विलुप्ति की कगार पर खड़ी प्राचीन लोकनाट्य परम्पराएं और हमारी चिंता ……… —————————- हमारा देश विविध कला और संस्कृति प्रधान देश रहा है जहाँ हर पचास और सौ किलोमीटर की

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काव्य धारा
umeshpansari123

विस्मृति

सुनहरी सजीली भोर, सुहानी नहीं आई, तरुणों में उत्साह की, रवानी नहीं आई। नवयुवक को नभ देख रहा है आशा से, जिंदगी चलने लगी, जिंदगानी नहीं आई।। लिखनी तुम्हें अपनी,

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काव्य धारा
hindijudwaan

कहां है सोने की चिड़िया?

    कहां है की चिड़िया?   इतिहास ही नहीं पढ़ा देखा है, दूर देशाटन यात्रा में गड़े शव जहां मैं खड़ा था पग पग पर वहीं पश्चिम में राजपूत

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ग़ज़ल
ddeep935

हालात

राहें सूनी, गलियाँ सब वीरान हो गए हैं जिंदा लाशों से देखो अब इंसान हो गए हैं।।                    *****      खून

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काव्यात्मक व्यंग्य
basudeo

ताटंक छंद “भ्रष्टाचारी सेठों ने”

ताटन्क छंद “भ्रष्टाचारी सेठों ने” (मुक्तक शैली की रचना) अर्थव्यवस्था चौपट कर दी, भ्रष्टाचारी सेठों ने।छीन निवाला दीन दुखी का, बड़ी तौंद की सेठों ने।केवल अपना ही घर भरते, घर

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अन्य काव्य विधाएं
basudeo

सरसी छंद “राजनाथजी”

सरसी छंद “राजनाथजी” भंभौरा में जन्म लिया है, यू पी का यक गाँव।रामबदन खेतीहर के घर, अपने रक्खे पाँव।।सन इक्यावन की शुभ बेला, गुजरातीजी मात।राजनाथजी जन्म लिये जब, सबके पुलके

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आलेख
hisarsushil

मुझको देखोगे जहां तक, मुझको पाओगे वहां तक, मैं ही मैं हूं, मैं ही मैं हूं दूसरा कोई नहीं…

सुशील कुमार ‘नवीन’ कोरोना की दूसरी लहर में देश के हालात दिनों-दिन बद से बदतर होते जा रहे हैं। सरकारी दावे और चिकित्सा व्यवस्था की धज्जियां उड़ रही है। हर

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ग़ज़ल
srijanaustralia

निजाम फतेहपुरी की गज़लें

1. ग़ज़ल- 122 122 122 122 अरकान- फ़ऊलुन फ़ऊलुन फ़ऊलुन फ़ऊलुन ग़ज़ल नक्ल हो अच्छी आदत नहीं है। कहे खुद की सब में ये ताकत नहीं है।। है  आसान  इतना 

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शोध पत्र
srijanaustralia

मोहन राकेश के नाटकों में अभिनेयता

मोहन राकेश ने नाटकों में ‘रंगमंच संप्रेषण’ का पूरा ध्यान रखा है। नाट्य लेखन में राकेश ने नए-नए प्रयोग किए है। जैसे- दृश्यबंध, अभिनेयता, ध्वनियोजना, प्रकाश योजना, गीत योजना, रंग-निर्देश के साथ-साथ भाषा के स्तर पर परिवर्तन के कारण नाटक को सजीव रूप मिला है। इसी कारण नाटकों में अभिनेयता अधिक रूप में फली फुली है। राकेश ने उपन्यास, कहानी संग्रह, नाटक, निबंध, एकांकी आदि विधाओं में कलम चलाई है। लेकिन नाट्य साहित्य में जो प्रसिद्धि मिली शायद किसी नाटककारों को मिली होगी। इसमें ‘आषाढ़ का एक दिन’ (1958), ‘लहरों के राजहंस’ (1963) और ‘आधे अधूरे’ (1969) में अभिनेयता को स्पष्ट करने का प्रयास किया है।

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आलेख
hisarsushil

हालात क्यों बिगड़े ये न पूछें, ये बताएं कि हमने इसके लिए क्या किया…

सुशील कुमार ‘नवीन’ कोरोना ने फिलहाल देश के हालात खराब करके रख दिए हैं। समाज का हर वर्ग पटरी पर है। व्यापार-कारोबार सब प्रभावित। अस्पतालों में न वेंटीलेटर मिल पा

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अन्य काव्य विधाएं
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आत्मबल

      आत्मबल (जब जीवन में और निराशा घेर लेती है तब हमारे अपने भी हम से विमुख हो जाते हैं परंतु किसी भी स्थिति में मनुष्य को अपना

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आलेख
hetrambhargav

कोरोना संकट में भारतीय संस्कृति का पुनरोदय 

    कोरोना संकट में भारतीय संस्कृति का पुनरोदय  हेतराम भार्गव “हिन्दी जुड़वाँ”   कोरोना आज वैश्विक बड़ी महामारी है। इस संदर्भ में विश्व स्तर पर इस महामारी को रोकने

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आलेख
hindijudwaan

कोरोना संकट में कार्यरत योद्ध़ाओं का संघर्ष

कोरोना संकट में कार्यरत योद्ध़ाओं का संघर्ष       हरिराम भार्गव “हिन्दी जुड़वाँ”                     कोरोना जैसी वैश्विक महामारी के कारण आज हम अपने- अपने घरों में बंद हैं

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काव्य धारा
bhargavahari22

माँ

  माँ (माँ, स्वयं विधाता का प्रतिरूप है और इस संसार में  नारी शक्ति – माँ पर दुनियाभर में अनंत काव्य सृजन किए  गए  हैं, किए जा रहे हैं। उन्हीं

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पृथ्वी दिवस विशेष – प्रकृति को “अनर्थ” से बचाने का संकल्प है “अर्थ डे”

सम्पूर्ण विश्व में पृथ्वी ही एकमात्र गृह है, जिस पर जीवन जीने के लिए सभी महत्वपूर्ण और आवश्यक परिस्थितियां उपयुक्त अवस्था में पाई जाती हैं | यही कारण है कि

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रिपोर्ट
srijanaustralia

कविता का काम स्मृतियों को बचाना भी है – अशोक वाजपेयी

हिन्दू कालेज में हमारे समय की कविता पर व्याख्यान दिल्ली। कविता का सच दरअसल अधूरा सच होता है। कोई भी कविता पूरी तब होती है अपने अर्थ में जब पढ़ने

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काव्य धारा
bhargavahari22

मैं स्त्री हूं

  मैं स्त्री हूं मैं स्त्री हूं, मैं संसार से नहीं                                                                    संसार मुझसे है,                                                                             जीवन का सार मुझसे है                                                                       मनुष्य का आधार मुझसे है

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वैश्विक हिंदी की चुनौतियां: कुछ भाषाई समाधान

विभिन्न समय ज़ोन में आप सभी को मेरा यथोचित अभिवादन। मैं आज आप सभी को एक अत्यन्‍त  महत्वपूर्ण मुद्दे पर संबोधित करने में सम्मानित महसूस कर रहा हूं । हिंदी का भूमंडलीकरण  एक ऐसा मुद्दा है,

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काव्य धारा
mds.jmd

कुछ कोलाब- खास रिश्ते

कुछ कोलाब- खास रिश्ते (काेलाब मन के वो भाव हैं जो मन मस्तिष्क से होते हुए हमें उत्साहित करते हुए, नई खुशियों के साथ परिवर्तन की चेतना प्रदान करते हैं।)

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*नवरात्रि पर्व दुर्गा पूजा हिन्दू/सनातन धर्म का त्योहार है*

*नवरात्रि पर्व दुर्गा पूजा हिन्दू/सनातन धर्म का त्योहार है***************************************** लेखक : *डॉ.विनय कुमार श्रीवास्तव*वरिष्ठ प्रवक्ता-पी बी कालेज,प्रतापगढ़ सिटी,उ.प्र.     पौराणिक महत्व का माँ दुर्गा की शक्ति की पूजा अर्थात

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*डॉ.भीम राव अम्बेडकर जयन्ती पर-विशेष काव्य*

*डॉ.भीमराव अम्बेडकर जयंती पर-विशेष काव्य*(जन्म,कर्म,शिक्षा,संघर्ष,उपलब्धि,मृत्यु व सम्मान) रचियता : *डॉ.विनय कुमार श्रीवास्तव*वरिष्ठ प्रवक्ता-पी बी कालेज,प्रतापगढ़ सिटी,उ.प्र.   बाबा साहब अम्बेडकर,जी की आज जयंती है।समाजसुधारक काम किये,उसका रंग वसंती है। जन्मे14अप्रैल1891में,महू

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*जय माता दी बोलें-नवरात्रि व राम नवमी है*

*”जय माता दी बोलें-नवरात्रि व राम नवमी है* **************************************** रचयिता : *डॉ.विनय कुमार श्रीवास्तव*वरिष्ठ प्रवक्ता-पी बी कालेज,प्रतापगढ़ सिटी,उ.प्र. आया है देखो यह माँ का त्योहार,सजने लगा देवी मैय्या का दरबार।

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*समाज सुधारक बाबा साहब डॉ.भीम राव अम्बेडकर*

*समाज सुधारक बाबा साहब डॉ.भीम राव अम्बेडकर***************************************** लेखक : *डॉ.विनय कुमार श्रीवास्तव*वरिष्ठ प्रवक्ता-पी बी कालेज,प्रतापगढ़ सिटी,उ.प्र.   भीम राव अम्बेडकर जी (बचपन में इनका नाम भीम सकपाल था) का जन्म

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कहानी
nandlalmanitripathi

बिशन

किशन सुबह ब्रह्म मुहूर्त की बेला में उठा और शाम के दिये बापू के आदेशों को याद कर बेचैन हो गया बापू ने शाम को किशन को समझाते हुए कहा

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नवगीत (कहाँ गया सच्चा प्रतिरोध)

सुन ओ भारतवासी अबोध,कहाँ गया सच्चा प्रतिरोध? आये दिन करता हड़ताल,ट्रेनें फूँके हो विकराल,धरने दे कर रोके चाल,सड़कों पर लाता भूचाल,करे देश को तू बदहाल,और बजाता झूठे गाल,क्या ये ही

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क्षणिकाएँ (विडम्बना)

(1)झबुआ की झोंपड़ी परबुलडोजर चल रहे हैंसेठ जी कीनई कोठी जोबन रही है।** (2)बयान, नारे, वादेदेने को तोसारे तैयारपर दुखियों की सेवा,देश के लिये जानसे सबको है इनकार।** (3)पुराना मित्रपहली

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काव्य धारा
srseossoda

वज़ूद

#वज़ूद इस कायनात में अगर कुछ हैतो वो सिर्फ “वज़ूद”अगर वो है तो ये सारी दुनियाँ तुम्हारे पक्ष में है । इसलिए ,,,,स्वयं को पढ़ो, लिखो, सँवारो,निखारो,अपने लिए भी,कुछ वक़्त

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कृष्णकलि

तुम एक कृष्णकलि हो, क्यों तुम सिमटी हुई, शरमाई हुई हो ? बागों में खिले फूल तुम्हारे साथी है फिर क्यों शरमाई हुई हो ?तितलियों की उड़ान तुम्हारे लिए है,

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*अमर शहीदों को नमन हमारा-श्रद्धा सुमन समर्पित*

*अमर शहीदों को नमन हमारा-श्रद्धा सुमन समर्पित***************************************** रचनाकार : *डॉ.विनय कुमार श्रीवास्तव*वरिष्ठ प्रवक्ता-पी बी कालेज,प्रतापगढ़ सिटी,उ.प्र.   नक्सलवाद आतंकवाद,ही भारत के दुश्मन हैं।नक्सलवादी आतंकवादी,सभी हमारे दुश्मन हैं। वीर एवं जांबाज़

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*”विश्व स्वास्थ्य दिवस-2021″पुनः बढ़ते कोरोना से जंग*

*”विश्व स्वास्थ्य दिवस-2021″ पुनः बढ़ते कोरोना से जंग* **************************************** लेखक: *डॉ.विनय कुमार श्रीवास्तव*वरिष्ठ प्रवक्ता-पी बी कालेज,प्रतापगढ़ सिटी,उ.प्र.   विश्व स्वास्थ्य दिवस पर आज हमारा भारत ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण विश्व

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काव्य धारा
meenakhond

गरिमा से रहो

गरीमा से रहो जब  कोई दे रही है बिंदियाॅ ,  हरे कांच की चुडियाॅकोई लगा रही है कुंकुंमतो  परहेज क्यों ?महिलाओंका यह बचपन का हक  है ।अपना हक अदा करना है

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रिपोर्ट
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हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने के लिए एकजुट आंदोलन की आवश्यकता : प्रो आशा शुक्ला

भारत के सभी हिंदी सवियों, हिंदी सेवी संस्थाओं विश्वविद्यालयों को एकजुट होकर हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने के लिए आंदोलन करने की आवश्यकता है। यह बात डॉ. बी.आर. अम्बेडकर सामाजिक विज्ञान विश्वविद्यालय

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काव्य धारा
bhargavahari22

मेरे हमसफ़र

मेरे हमसफ़र मैं तेरी जीवनसंगिनी तू मेरे सिर का ताज कल की विपदा सोच क्यों खोये हो आज साथी हूँ‌ तेरे पथ की हरपल चलूं तेरे संग कौन झूठलाए प्रेम

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नई कविता
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आत्मा की परमयात्रा का परमात्मा जीजस

यूं नहीं युग मे कोई भी स्वर सा गूंजता बन ईश्वर सत्यार्थ ।।जाने कितनी ही दुःखपीड़ा से पड़ता जिसका पालायुग वर्तमान स्वर की सत्यसाधना अवतार आत्मा की परम यात्रा करना

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काव्य धारा
nandlalmanitripathi

बसंत और फाग

आई आई बसंत बहार लहलहाते खेत खलिहानपीले फूल सरसों के खेतों मेंबाली झूमें खुशियों की बान हज़ार।।आई आई बसंत बाहरलाहलाते खेत खलिहान। बजते बीना पाणि केसारंगी सितार माँ की अर्घ्यआराधना

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गीत
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बासंती बयार रफ्ता रफ्ता

बासंती बयार रफ्ता रफ्ताफागुन की फुहार रस्ता रस्ताहोरी की गोरी का इंतजार लम्हा लम्हा।।आम के बौर मधुवन की खुशबू ख़ासकली फूल गुल गुलशन गुलज़ाररफ्ता रफ्ता।।माथे पर बिंदिया आंखों में काजल

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नई कविता
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किस रंग खेलू होली

दिल दुनियां के रंग अनेकोंकिस रंग खेलूं होलीमईया ओढे चुनरी रंग लालकेशरिया बैराग किस रंग खेलूं होली।।रंग हरा है खुशहाली हरियाली पहचानखुशियों का अब रंग नही हैजीवन है बदहाल किस

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कहानी
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थाने वाला गांव

  विल्लोर गांव का एकात्म स्वरूप बदल चुका था गांव छोटे छोटे टोलो में जातिगत आधार में बंट एक अविकसित कस्बाई रूप ले चुका था जहाँ हर व्यक्ति गांव के

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होलिका दहन

*होलिका दहन* हर साल मुझकों जलाने का अर्थ क्या हुआ ? सोच से अपनें मेरें जैसे सामर्थ सा हुआँ हाथ में मशाल वालों से पूछतीं हैं होलिका जलाने का प्रयास

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