चंपावत : उत्तराखंड का वह अनमोल पर्यटन रत्न, जहाँ प्रकृति बार-बार बुलाती है
चंपावत : उत्तराखंड का वह अनमोल पर्यटन रत्न, जहाँ प्रकृति बार-बार बुलाती है – डॉ. शैलेश शुक्ला विश्व भर में पर्यटन उद्योग तेजी से बदल रहा है। आधुनिक यात्री अब

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं
प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

सुप्रसिद्ध चित्रकार, समाजसेवी एवं
मुख्य संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया
चंपावत : उत्तराखंड का वह अनमोल पर्यटन रत्न, जहाँ प्रकृति बार-बार बुलाती है – डॉ. शैलेश शुक्ला विश्व भर में पर्यटन उद्योग तेजी से बदल रहा है। आधुनिक यात्री अब
साहित्यिक पत्रिकाओं को प्रतिद्वन्द्विता की दौड़ से बाहर निकालकर एक परिवार बनाने का उपक्रम है यह सम्मेलन-डॉ विकास दवे डॉ. विकास दवे निदेशक साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश ===================== इंदौर। साहित्य की
मध्य प्रदेश संस्कृति विभाग के साहित्य अकादमी की ऐतिहासिक पहल की समीक्षा साहित्यिक पत्रिकाओं को प्रतिस्पर्धा से निकालकर एक परिवार में रूपांतरित करने का प्रयास है यह सम्मेलन — डॉ.
जरूरी और उपयोगी है संपादकीय कर्म की चुनौतियों पर प्रशिक्षण और संपादकों के बीच आपसी विमर्श – डॉ. शैलेश शुक्ला डॉ. शैलेश शुक्ला समूह संपादक सृजन संसार अंतरराष्ट्रीय पत्रिका समूह
अटूट बंधन महेन्द्र तिवारी सुबह के साढ़े चार बजे थे। रात का अंधियारा अभी पूरी तरह से हटा नहीं था और आसमान में तारे भी अपनी चमक खो चुके
पिताजी का कोट सन्तोष कुमार झा अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक कोंकण रेलवे पिता का कोट पहनते ही जाने क्या हो जाता है।सर तना, कदम तेज़ होंठों पर मुस्कान ,आँखों में चमक और
इंदौर में 30–31 मार्च को साहित्यिक पत्रिकाओं का राष्ट्रीय समागम, देशभर के संपादक होंगे शामिल डॉ. विकास दवे निदेशक, साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश मध्य प्रदेश साहित्य अकादमी द्वारा आगामी 30
बी. एल. गौड़ के गीतों में आध्यात्मिक चेतना और राष्ट्रीयता (काव्य समग्र-गीत के विशेष संदर्भ में) शोधार्थी : बरबी ललबियाकसाङी साइलो शोध-निर्देशक : प्रो. सुशील कुमार शर्मा हिंदी विभाग, मिजोरम
जब तक बराबरी ज़मीन पर नहीं उतरती, अधूरा है लोकतंत्र — डॉ. प्रियंका सौरभ भारत का लोकतंत्र विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में अपनी पहचान रखता है। यह
🔹‘गली बचपन की’ विषय पर राष्ट्रीय बाल साहित्य संगोष्ठी में जुटे देशभर के बाल रचनाकार🔹साहित्य अकादमी मप्र के महती आयोजन में साहित्यकार वशोधार्थियों ने बताए समस्याओं के समाधान🔹समापन सत्र में
तथ्यों की यात्रा को सत्य की परिणति तक पहुँचाना ही शोध है : प्रो. हरीश अरोड़ा ‘तथ्य अनंत हो सकते हैं किंतु वास्तविक तथ्यों की यात्रा को सत्य की परिणति
बाल साहित्य द्वारा कर सकते हैं प्राकृतिक चेतना की रक्षा – गर्ग आयोजन में हुआ अनेक पुस्तकों का विमोचन भोपाल। यह बाल साहित्य को संवर्द्धित करने का अवसर है। बालकों
आगि लगै ऐसे फागुन में आगि लगै ऐसे फागुन में बुढ़ऊ तक बौरावें बिना बात के खांसी खांसें बिना बात मठरावें। देवर की तौ बात कछू ना जेठन लाज
“मंज़िल तक कैसे पहुँचें” हम मंज़िल तक पहुँचें कैसेजब संग तुम्हाराअपने साथ नहीं,ऐसा अक्सर तब होता हैजब भाग हमाराअपने साथ नहीं। तुम तो ऐसे बिछुड़े जैसेमेले में खोया
जब हम रवीन्द्रनाथ टैगोर का नाम लेते हैं, तो एक पूरी सदी की सांस्कृतिक चेतना मानो हमारे सामने सजीव हो उठती है। वे केवल एक कवि नहीं थे, बल्कि दार्शनिक,
हिन्दी का वैश्विक फलक और जनसंचार माध्यम सूरज के प्रसाद भाषाविद् हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय ईमेल पता : [email protected] सारांश (Abstract): इक्कीसवीं सदी में सूचना प्रौद्योगिकी (Information Technology)
1 — मैं कौन हूं मैं अजनबी हूं लिखना मेरा शौक है लोग कहते हैं मैं कवि हूं सुबह उठ कर धोता हूं अंधकार किरणों से करता हूं प्रकाश
मानवीय एवं सामाजिक संवेदनाओं के आइने में पाटण की सांस्कृतिक विरासत पटोला हस्तकला एवं हस्तकला कारीगरः एक अध्ययन डॉ. लोकेश जैन एवं डॉ. देबेन्द्र दास सार संक्षिप्त हिन्दी
प्रयागराज की हिंदी पत्रकारिता पर दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का भव्य आयोजन संपन्न प्रयागराज, 24 जून 2025। हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्षों की ऐतिहासिक यात्रा को रेखांकित करते हुए जगत तारन
फ़ील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ की 18वीं पुण्यतिथि के अवसर परकृत्रिम मेधा के दौर में हिंदी पत्रकारिता प्रशिक्षण विषयक विशेषज्ञ वार्ता का आयोजन 27 जून को हिंदी पत्रकारिता के 200वें वर्ष
अंतरराष्ट्रीय हिंदी पत्रकारिता वर्ष 2025-26 के अंतर्गत मध्य प्रदेश में हिंदी पत्रकारिता विषय पर अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का भव्य आयोजन न्यू मीडिया सृजन संसार ग्लोबल फाउंडेशन एवं अदम्य ग्लोबल फाउंडेशन के
“अंतरराष्ट्रीय शोधार्थी सम्मान योजना” उद्देश्यहिंदी पत्रकारिता के 200वें वर्ष के सुअवसर पर न्यू मीडिया सृजन संसार ग्लोबल फाउंडेशन एवं अदम्य ग्लोबल फाउंडेशन के सहयोग से सृजन ऑस्ट्रेलिया, सृजन मॉरीशस, सृजन
प्रयागराज में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी : हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्षों को समर्पित भव्य आयोजन प्रयागराज, जून 2025। हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्षों की गौरवपूर्ण यात्रा के सुअवसर 30
राजमाता जीजाबाई की 352वीं पुण्यतिथि पर हिंदी की साहित्यिक पत्रकारिता : विविध आयाम” विषयक अंतरराष्ट्रीय संवाद का आयोजन 17 जून 2025 को शाम 8:40 बजे (भारतीय समय) भारतवर्ष की महान
विविध आयामों में विस्तार लेती वैश्विक हिंदी पत्रकारिता : विशेषज्ञ वार्ता की ऐतिहासिक प्रस्तुति 16 जून 2025, शाम 6 :00 बजे (भारत समय) — अंतरराष्ट्रीय हिंदी पत्रकारिता माह – 2025
हिंदी पत्रकारिता के 200वें वर्ष के सुअवसर पर अंतरराष्ट्रीय हिंदी पत्रकारिता वर्ष – 2025–26 के अंतर्गत 30 मई से 30 जून 2025 तक आयोजित किए जा रहे अंतरराष्ट्रीय हिंदी पत्रकारिता
पं. रामप्रसाद बिस्मिल की 129वीं जयंती पर विषय-विशेषज्ञ से संवाद झारखंड में हिंदी शिक्षा, साहित्य और पत्रकारिता पर अंतरराष्ट्रीय विमर्श ‘न्यू मीडिया सृजन संसार ग्लोबल फाउंडेशन’ एवं ‘अदम्य ग्लोबल फाउंडेशन’
‘हिंदी का वैश्विक परिदृश्य : विविध आयाम’ विषय पर होगा अंतरराष्ट्रीय संवादहिंदी पत्रकारिता के 200 वर्षों की स्मृति में 12 जून को विशेष आयोजन लखनऊ/मॉरीशस/त्रिपुरा। हिंदी पत्रकारिता के 200वें वर्ष
फ़ील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ की 18वीं पुण्यतिथि पर आयोजन संबंधित विशेष समाचारकृत्रिम मेधा के दौर में हिंदी पत्रकारिता प्रशिक्षण विषयक विशेषज्ञ वार्ता का आयोजन 27 जून को हिंदी पत्रकारिता के
विशेष रिपोर्ट ऑस्ट्रेलिया में हिंदी : विविध आयाम’ विषयक विशेषज्ञ वार्ता का आयोजन हिंदी पत्रकारिता के 200वें वर्ष के सुअवसर पर आयोजित ‘अंतरराष्ट्रीय हिंदी पत्रकारिता माह – 2025’ के अंतर्गत
7 जून को विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस पर विशेष लेख खाद्य पदार्थों का खेत से थाली तक हो सुरक्षित सफ़र डॉ. शैलेश शुक्ला वरिष्ठ लेखक, पत्रकार, साहित्यकार एवं वैश्विक समूह संपादक, सृजन
विशेष रिपोर्ट ऑल
7 जून को 7वें विश्व खाद्य दिवस के अवसर पर विशेष रिपोर्ट ‘राजभाषा हिंदी और बैंकिंग : विविध आयाम’ विषय पर आयोजित होगी अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ वार्ता 7 जून, 2025 को
हिंदी पत्रकारिता के 200वें वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित अंतरराष्ट्रीय हिंदी पत्रकारिता माह-2025 के अंतर्गत ‘यूके में हिंदी: विविध आयाम’ विषयक वार्ता का भव्य आयोजन हिंदी पत्रकारिता के 200 गौरवशाली
अंतरराष्ट्रीय हिंदी पत्रकारिता माह – 2025 का भव्य शुभारंभ : राजदूत अखिलेश मिश्रा के आशीर्वचनों से होगा भव्य उद्घाटनहिंदी पत्रकारिता के दो सौ वर्षों की ऐतिहासिक यात्रा को रेखांकित करते
अंतरराष्ट्रीय हिंदी पत्रकारिता माह – 2025 : वैश्विक स्तर पर हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्षों का भव्य आयोजन हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्षों की गरिमामयी यात्रा के स्मरणीय अवसर पर
अंतरराष्ट्रीय शोध आलेख प्रतियोगिता उद्देश्य हिंदी पत्रकारिता के 200वें वर्ष के सुअवसर पर न्यू मीडिया सृजन संसार ग्लोबल फाउंडेशन एवं अदम्य ग्लोबल फाउंडेशन के सहयोग से सृजन ऑस्ट्रेलिया, सृजन मॉरीशस,
हमसे संपर्क करने के लिए आपका हार्दिक आभार आपकी भेजी गई सभी प्रकार की रचनाएं ‘न्यू मीडिया सृजन संसार ग्लोबल फाउंडेशन’ द्वारा संचालित ‘सृजन संसार अंतरराष्ट्रीय पत्रिका समूह’ के अंतर्गत प्रकाशित होने
रिहाई कि इमरती – स्वतंत्रता किसी भी प्राणि का जन्म सिद्ध अधिकार है जिसे कभी छीना नहीं जा सकता हां कभी कभी प्राणि विशेष कर मनुष्य अपने अहंकार शक्ति दंभ
नव वर्ष 2023 कि शुभकामनाएं- शुभारम्भ है शुभारम्भ हैलुका छिपी सूरज की बहुत ठंड है।। शुभारम्भ है शुभारम्भ है शहरों गलियों फुटपाथों पर सोया भूखा जीवन ठिठुर ठिठुर कर तंग
अन्तर्राष्ट्रीय हिंदी दिवस – अंतर्मन अभिव्यक्ति है हृदय भाव कि धारा हैपल प्रहर बहने और निखरने दोहिंदी तो अपनी बोली हैइसे जन जन मन से ही निकलने दो।। पग
-आराच पन्नक- कहानी अतीत कि घटित सत्य घटनाएं जो वर्तमान एव भविष्य के लिए दिशा दृष्टिकोण का मार्ग प्रदान करते हुए शिक्षा एव संवेदनाओ के लिए प्रेरणा परक होते है
शीर्षक – अपकर्म भारत के महत्पूर्ण नगरी काशी वाराणसी बनारस कि सांस्कृतिक शैक्षिक प्रवृति से विधिवत परिचित हूं अपने पंद्रह वर्षों के प्रवास में बहुत से मित्र एवं शत्रुओं को
प्लेटफार्म – प्रत्येक मनुष्य के जीवन में कभी कभी कुछ ऐसे पल प्रहर आते है जो बिना प्रभावित किए नहीं रहते है एवं जिनका प्रभाव व्यक्तित्व पर जीवन भर लिए
चंद्रमा और कुमुदिनी———————- तुम जीवन-नौका के खेवैयामैं संग तुम्हारे बहती गयीउस पार उतरने की आशा मेंतुमको हर पल तकती रही आँधी और तूफां ने घेरा पर, तुमने साथ कभी न
सुशील कुमार ‘नवीन’ 12 अगस्त को विश्व संस्कृत दिवस है। देवभाषा संस्कृत को सम्मान देने का दिन। विश्वभर में संस्कृत को चाहने वालों के लिए यह दिन किसी पर्व से
तिलका छंद “युद्ध” गज अश्व सजे।रण-भेरि बजे।।रथ गर्ज हिले।सब वीर खिले।। ध्वज को फहरा।रथ रौंद धरा।।बढ़ते जब ही।सिमटे सब ही।। बरछे गरजे।सब ही लरजे।।जब बाण चले।धरणी दहले।। नभ नाद छुवा।रण
मानव छंद “नारी की व्यथा” आडंबर में नित्य घिरा।नारी का सम्मान गिरा।।सत्ता के बुलडोजर से।उन्मादी के लश्कर से।। रही सदा निज में घुटती।युग युग से आयी लुटती।।सत्ता के हाथों नारी।झूल
मंगल मूरत जै जै जै गण पति गण नायक शुभ कर्मों के देव विनायक जै जै जै गण पति गण नायक!! मातृ भक्ति की शक्ति प्रथम पूज्यते देव गज़ानन!! जै
जै जै जै अम्बे मातु भवानी माँ दुर्गा जग कल्याणी!!जै जै जै अम्बे मातु भवानी माँ दुर्गा जग कल्याणी!! मनोकामना कि तू माता, ममता का आँचल वात्सल्य कि मुरत सूरत
राम तो जीवन मूल्यों का नामराम धर्म धैर्य का मान।।राम विशुद्ध सात्विक संस्कारराम राम से प्रणाम।।राम राम राम अभिशाप राम नाम ही आदि राम नामही अंत हर ह्रदय में राम
चलो आज हम राम को खोजे कहाँ हम आ गए खुदको खोजते भटकतेनगर की हर डगर पर तेरा नाम लिखा हैंतेरी अवनि का कण कण एक दर्पण के जैसा हैं।तेरी
चलो राम बताएं– चलो आज हम राम बताएंराम मर्यादा अपनाएँ।। राम रिश्ता मानवता कीअलख जगाएं।। प्रभु राम का समाज बनाएंमात पिता की आज्ञा सेवा स्वयं सिद्ध का राम बनाएं।। भाई
राम स्वयं को भक्त राम काकहते बड़ा मुश्किल हैभक्त राम का बन पाना।। राम तो मर्यादा पुरुषोत्तमकठिन है जिंदगी में मर्यादानिभा पाना।। पिता की आज्ञा से स्वीकाराराम ने वन में
——जग जननी माँ—– 10-जग जननी दुःख हरणी ,मंगल करनी तू तारणहारी तू सकल जगत संसार माँ।।दुष्ट विनासक, भय भव भंजकपल, प्रहर अविरल युग प्रवाह माँ।।जग जननी तू सकल जगत संसार
माँ आओ मेरे द्वार माईया पधारों घर द्वारेभक्तों का है इंतज़ारघर घर तेरा मंडप सजा हैमाईया के स्वागत का दिन रात।। माईया तेरे रूपों का संसारमाईया तू ही अवनि की
भय भव भंजक कष्ट निवारिणी पाप नाशिनी माँजय जय जय दुर्गे सकल मनोरथदायनी माँ।। दुर्लभ ,सुगम शुभ मंगल करतीअंधकार की ज्योति माँ।जय जय जय दुर्गे सकल मनोरथ दायनी माँ।। आगम
जगत माँ जग जननी दुःख हरणी ,मंगल करनी तू तारणहारी तू सकल जगत संसार माँ।।दुष्ट विनासक, भय भव भंजकपल, प्रहर अविरल युग प्रवाह माँ।।जग जननी तू सकल जगत संसार माँ।।पाप
जय माँ जगदम्बा माँ जिसे बुलाती जाता माँ दरबार ,माँ कीज्योति जली है ,जग में है उजियार बोलोजय मात दी ।। बोले जाओ कदम कदम से बढ़ते जाओ माता ने
5– माँ तेरे चरणों मे जग तेरे चरणाें आया मेरी माँ जग तेरे शरणाें में आया मेरी माँ!! तेरे आँखो का दुलार माँ तेरी संतान, तेरे आँचल का प्यार माँ
जै जै जग जननी माँ— जग जननी ,सकल जगत संसार माँदुःख हरणी ,मंगल करनी ,तू तारणहार माँ जग जननी, सकल जगत संसार माँ।। दुष्ट विनासक, भय भव भंजकपल, प्रहर अविरल
जै मां काली जै जगदंबै जै माँ काली, जै जगदंबै जै माँ काली ,वीर भूमि भी आंचल तेरा तूं जग जननी जग रखवाली!! जै जगदंबै जै माँ काली, जै जगदंबै
शिवोहं शिवोहं शिवोहं चिता भस्म भूषित श्मसाना बसे हंम शिवोहं शिवोहं शिवोहं।। अशुभ देवता मृत्यु उत्सव हमारा शुभोंह शुभोंह शुभोंह शुभोंह शिवोहं शिवोहं शिवोहं ।। भूत पिचास स्वान सृगाल
तपोवन शौर्य प्रखर निखर सूरज पूर्णिमा चन्द्र हलाहल विष भरा जहां मधुर मिठास अमृत जैसा।। ऊंचाई गौरी शंकर पर्वत गहराई समुद्र अंतर मन प्रशांत प्रतिदिन मंथन सागर जैसा।। राष्ट्र समाज
अनुष्ठान अनुष्ठान जीवन का चलता रहेशौम्य शांत संचारित संस्कारकरता रहे।। भ्रम अनिश्चय का अँधेरा हटेराष्ट्र समाज गौरव मान प्रकाशितहोता रहे।। जीवन कि तपस्या का पुण्य प्रतापप्रसाद युग युवा पीढ़ी का
जीवन का मौलिक मूल्य राष्ट्र जीवन यात्रा का एक अहम पड़ाव अविरल निर्मल निश्छल निरपेक्ष निर्विकार समाज राष्ट्र हित अनुष्ठान।। त्याग तपस्या सोच कर्म धर्म दायित्व बोध प्रखर निखर परिणाम।पल
जीवन का मौलिक मूल्य राष्ट्र जीवन यात्रा का एक अहम पड़ाव अविरल निर्मल निश्छल निरपेक्ष निर्विकार समाज राष्ट्र हित अनुष्ठान।। त्याग तपस्या सोच कर्म धर्म दायित्व बोध प्रखर निखर परिणाम।पल
साहित्य और समय समय प्रबाह परिस्थिति परिवेश वर्त्तमान की दृष्टि दिशा मार्ग है।। साहित्य भाव झरना झील नदियांसिंधु समागम नित्य निरंतता अक्षुण अक्षय उजियार है।। शब्द ओजस्वी ओज जन जनमन
हिन्दू नव वर्ष मनाए– चलो हिन्दू नव वर्ष मनाएआशाओं, विश्वास का उत्साह उमंग चाह प्रसंग केनए सुबह का अलख जगाएचलो हिन्दू नव वर्ष मनाए।। उत्कर्ष,हर्ष दुःख दर्द के बीते पलकि
आदि शक्ति अम्बे जगदम्बे आराधना खंड हे देवी माँ तू भय भव भंजक जगत कल्याणी दुष्टो की दुर्गा काली भक्तो की रखवाली शक्ति दे मुझे अपनी भक्ति का भाव भाग्य
हे माँ तू अवनि अवतारी पर्वत की बाला दुःख हरने वालीजग कल्याणी जय अम्बे जय जगदम्बे !! तू सीता सावित्री पार्वती विघ्नेश्वरी भुनेश्वरी बाघम्बरी चंडी चंडिका मनसा महिमा मनोकामना!! तू
अटूट विश्वास मंजिल को ढूंढ़ने सभी घर के तारे निकल पड़े आंखों मे जो इक ख्वाब है उसे पाने निकल चले गम की अँधेरी रातों में जलना होगा तुझे कांटो
वर्तमान समय मे नैतिक शिक्षा की अनिवार्यता क्यूँ जरुरी है ? हमारा देश अपनी प्राचीन सभ्यता एवं संस्कृति के कारण आज पूरे विश्व मे सिरमोैर बना हुआ है, किंतु कुछ
तुम क्या कहोगे मुझे? पहचान के लिए एक अदना सा शब्द तो दे ना सके और दे भी क्या सकते हो तुम मैं क्यों मांगू नाम थोड़े ही मांगा
नवगीत सबका अपना तौर-तरीकासबके अपने पैमाने हैं। हैं कई सभ्यताएँऔर उनमें संघर्ष है।कैसे होगा फिरइंसानियत का उत्कर्ष है।। अगर हमारा पंथ निरालाउसके सौ-सौ अफसाने हैं। एकीकृत करने का अबकोई वक्त
22 22 22 22ग़ज़ल वह तो अफलातून लगा है।पशुता गर नाखून लगा है।। भ्रष्टाचार बढ़ाने वाले,उनके मुँह में खून लगा है। जाड़े के दिन पाँव पसारे,यानि सलाई-ऊन लगा है। सोच-विचार
22 22 22 22ग़ज़ल वह तो अफलातून लगा है।पशुता गर नाखून लगा है।। भ्रष्टाचार बढ़ाने वाले,उनके मुँह में खून लगा है। जाड़े के दिन पाँव पसारे,यानि सलाई-ऊन लगा है। सोच-विचार
इक्कीसवीं सदी में देखा गया है कि लगभग हर दो-तीन वर्ष में नवगीत के संकलन प्रकाशित हो रहे हैं, जिनमें कुछ वृहद संकलन हैं, तो कुछ संक्षिप्त हैं। इन संकलनों
नवगीत-जैसे हबूब गया सूरज निकला सुबह-सुबह शाम को डूब गया। किरणों ने दुनिया में धूप की चादर फैलाई। संगीत फूटा निर्झर से कल-कल की ध्वनि आई।।
यातायात-नवगीत यातायात मन में दु:ख-विषाद का चल रहा है। जगह-जगह हो रही दुर्घटना है। हो चाहे भोपाल या पटना है।। हैं कैसा समय चाँदनी का रूप
मीना कुमारी नाज़ की शायरीडॉ. वसीम अनवर सहायक प्राध्यापक उर्दू एवं फारसी विभाग डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर, मध्य प्रदेश [email protected]; 9301316075 मीना कुमारी को एक अव़्वल दर्जा की
माँ हो कर ही जाना जा सकता है माँ का होना भी । काँधे पे पेट सिर पर गठरी कोरोना यात्रा । धूप से लड़े हमको छाया देने
कस्तूरी मेरी ‘कस्तूरी’ मुझे देती रही भटकन ……… उम्रभर जो मरा तो जाना कि मारा भी गया इसी के लिए । Last Updated on September 20, 2021 by rnbanyala रचनाकार
अभिषेक करें जन वाणी का ================ अभिषेक करें जन वाणी का नागरी का, दीव्यागीर्वाणी का ओंकार जन्मा, संस्कृत सृष्टा जग वन्दिनी, देव–नन्दिनी खलिहान–खनक, मात वाणी
भारत -रत्न , पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय श्री अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मदिवस पर गत वर्ष आयोजित अंतरराष्ट्रीय अटल काव्य- लेखन प्रतियोगिता में चयनित 51 कविताओं का संग्रह ‘श्रेष्ठ इक्यावन कविताएं’
रज्जो रात के दस बज रहे होंगे। कॉलनी के गेट से होकर आ रही मिलिट्री हॉस्पिटल की वैन देखकर हैरान रह गयी | इस समय कौन सी इमरजेंसी है
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मैं इस नदी के साथ,जीना चाहता हूँ..डूबना चाहता हूँ..इसके भीतर!!तैर कर सभी.. पार कर लेते हैं नदियाँ।नाव पर घूमते हुए..देखते हैं सभी।मैं डूब कर भीतर तकदेखना चाहता हूँ भीतर से
सभी व्यवसायी चाहते हैं, उनका बेटा बड़ा होकर यदि कुछ नहीं तो उनका ही रोज़गार संभाले। परन्तु एक किसान कभी स्वप्न में भी नहीं सोचता कि उनका बेटा बड़ा होकर
प्रेम… ये वो प्यारा नाम है जो प्यार, स्नेह, मोह, प्रीत, आनन्द, हर्ष का एक अद्भुत संयोग है। जो ह्रदय में ममत्व की भावनाओं को उत्पन्न करता हैं। जहाँ इसमें,
लड़के जब रोते हैं,प्रकृति में असंतुलन बढ़ जाता है। सूर्य अपने तीव्र वेग पर आ जाते हैं। समंदर में वाष्पोत्सर्जन चरम पर होता है। पृथ्वी का जलस्तर तेजी से घटता
अत्यंत कठिन है तुम्हारे सौंदर्य का वर्णन तुम्हारे सौंदर्य को देखना ठीक वैसा ही है,जैसे बारिश के बाद इंद्रधनुष को ढूंढना!तुम्हारे सुंदरता का उत्कर्ष है तुम्हारे चेहरे की लालिमाजैसे उदय
भारत के पूर्व प्रधानमंत्री एवं सुप्रसिद्ध कवि भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की जयंती 25 दिसंबर 2021 के अवसर पर विश्व हिंदी सचिवालय, मॉरीशस, न्यू मीडिया सृजन संसार
मैं अपने गांव का सबसे पढ़ा लिखा लड़का हूं , अच्छी सरकारी नौकरी है , शहर में घर भी है जो मेरे पिता जी ने बनवाई है, और मैं 10
मैं गांव का सबसे पढ़ा लिखा लड़का हूं , अच्छी सरकारी नौकरी है , शहर में घर भी है जो मेरे पिता जी ने बनवाई है, और मैं 10 लाख
वह मीठे पानी की नदी थी। अपने रास्ते पर प्रवाहित होकर दूसरी नदियों की तरह ही वह भी समुद्र से जा मिलती थी। एक बार उस नदी की एक मछली
मंदिर मस्जिद का बनना। दुनियां में सरेआम हुआ।। आदमी बन न सका बंदा। रब्ब यूं ही बदनाम हुआ।। जात पांत का चक्कर बड़ा। भक्ति का मार्ग ताम हुआ।। जंगल जंगल
तोटक छंद “विरह” सब ओर छटा मनभावन है।अति मौसम आज सुहावन है।।चहुँ ओर नये सब रंग सजे।दृग देख उन्हें सकुचाय लजे।। सखि आज पिया मन माँहि बसे।सब आतुर होयहु अंग
तिलका छंद “युद्ध” गज अश्व सजे।रण-भेरि बजे।।रथ गर्ज हिले।सब वीर खिले।। ध्वज को फहरा।रथ रौंद धरा।।बढ़ते जब ही।सिमटे सब ही।। बरछे गरजे।सब ही लरजे।।जब बाण चले।धरणी दहले।। नभ नाद छुवा।रण
*युवाओं के प्रेरणास्रोत स्वामी विवेकानंद*(स्वामी विवेकानंद जी के पुण्यतिथि पर समर्पित)**************************************** रचयिता :*डॉ.विनय कुमार श्रीवास्तव* 12जनवरी1863 कोलकाता धरती महान।जन्मे जहाँ श्री स्वामी विवेकानंद जी महान। कुलीन बंगाली कायस्थ परिवार