Category: काव्य धारा
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गीत
देशभक्ति-काव्य लेखन प्रतियोगिता” हेतु कविता – राष्ट्र वंदना
मुक्त चित् प्राण मन से, अहोराष्ट्र की वन्दना हम करेंशुद्ध चित् प्राण मन से, अहोअभ्यर्थना हम करेंराष्ट्र ही
January 9, 2021
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गीत
मैं
*।।मैं।।*मैं चिर नवीन मैं अति प्राचीनमैं खुशमिज़ाज मैं ग़मशीन मुझमें यह संसार समाया हैंमुझसें मोह मोक्ष माया हैं
January 9, 2021
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January 9, 2021
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नई कविता
Uchit pratiyogita ( Basant Utsav )
——-“अलौकिक भूलोक”——- पर्वतों की श्रृंखलायें, गान गायें शान का प्रतीक वनस्पति बृक्षादि हैं, तेरे आत्मसम्मान का I तूफान
January 8, 2021
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