न्यू मीडिया में हिन्दी भाषा, साहित्य एवं शोध को समर्पित अव्यावसायिक अकादमिक अभिक्रम

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

सृजन ऑस्ट्रेलिया | SRIJAN AUSTRALIA

विक्टोरिया, ऑस्ट्रेलिया से प्रकाशित, विशेषज्ञों द्वारा समीक्षित, बहुविषयक अंतर्राष्ट्रीय ई-पत्रिका

A Multidisciplinary Peer Reviewed International E-Journal Published from, Victoria, Australia

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं
प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

श्रीमती पूनम चतुर्वेदी शुक्ला

सुप्रसिद्ध चित्रकार, समाजसेवी एवं
मुख्य संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

Category: काव्य धारा

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नई कविता
nandlalmanitripathi

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस प्रतियोगिता नैतिकता और नारी

घृणा घमंड का उत्पातअनैतिकता अत्याचार कीबोझिल नारी ।।युग मानवता परम् शक्तिसत्ता पर भारी नारी।।दहेज का दानव होया वहसी

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नई कविता
nandlalmanitripathi

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस प्रतियोगिता नारी और समाज

नैतिकता का अभिमानपुरुषार्थ पराक्रम कीअर्थ आवाज़ ।।नारी कमजोर नहीपग प्रगति की शक्तिभाग्य काल भगवान कीअंतर शक्ति मान।।कोमल हृदय

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काव्य धारा
mds.jmd

मुझे उस ओर जाना है

मुझे उस ओर जाना है मुझे उस ओर जाना है” कविता समस्त स्त्री वर्ग की जिजीविषा को उन्मुक्त

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नई कविता
padma.pandyaram

वो पल

                                     वो  पल                                                             दिल के कोने में                                                              चुपके चुपके  झरोखों  से,                                                                हवा के साए आये

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मोह

मोह़़़़़़़़़़़़सांसों से मोह कभी छूटता नहीं ,बंधनों में बंध कर भी दम घुटता नहीं!! शाम निराश तो करती

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मोह

मोह़़़़़़़़़़़़सांसों से मोह कभी छूटता नहीं ,बंधनों में बंध कर भी दम घुटता नहीं!! शाम निराश तो करती

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खंडकाव्य
nandlalmanitripathi

सूर्य और देव

पवन पुत्र शिष्य पुत्र शनिदुःख भय भंजक न्याय दंडके दाता सारे सूरज संगभाग्य दुर्भाग्य के दाता।।धर्म शास्त्रों में

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खंडकाव्य
nandlalmanitripathi

सूर्य और सत्य

युग के हर प्राणी की निद्राशौर्य सूर्य के सुबह शाम कीप्रतिद्वंनि आकर्षक ।।नई सुबह आशा विश्वाशसंबाद संचार गति

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खंडकाव्य
nandlalmanitripathi

सूर्य और जीवन

ना कोई लाचारी ना कोईदुःख व्याधि कायनात मेंखुशियों खुशबू का हर मनआँगन घर आँगन से नाताशौर्य सूर्य कहलाता।।युग

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खंडकाव्य
nandlalmanitripathi

सूर्य और संसार

ब्रह्म मुहूर्त की बेला मेंमंदिर में घन्टे घड़ियालेबजते गुरु बानी सबदकीर्तन गुरुद्वारों मेंमस्जिदों में आजाने होती।।सबकी उम्मीदे चाहतनई

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