Category: काव्य धारा
Categories
“मेरे भी सपने हैं “
“मेरे भी सपने हैं”नारी हूं मैं वस्तु नहीं मेरे भी सपने हैं।जननी हूं मैं सृष्टि कीनवजीवन मुझसे पाता।केवल
January 22, 2021
No Comments
January 22, 2021
No Comments
January 22, 2021
No Comments
कैसे प्रिय पर अधिकार करूं…??
रचना शीर्षक :” कैसे प्रिय पर अधिकार करूं : एक अन्तर्द्वन्द “________________________________________ तुम प्रेम गीत का राग चुनो,मैं
January 22, 2021
1 Comment
हे मेघ…हृदय के भाव सुनो…!!!
हे मेघ…! हृदय के भाव सुनो…!!_________________________निर्जन वन के पुनर्सृजन को,हे मेघ…! घुमड़ के आ जाओ,मन की दुर्बलता पर
January 22, 2021
No Comments
January 22, 2021
No Comments
निः स्वार्थ प्रेम…!!!
मन की दीवारों के भीतर,मौन धरे वो कौन पड़ा..?अहम और निःस्वार्थ प्रेम में,हर क्षण सोचे है कौन बड़ा..??
January 22, 2021
No Comments




