
संतोष कुमार झा की कविता ‘पिताजी का कोट’
पिताजी का कोट सन्तोष कुमार झा अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक कोंकण रेलवे पिता का कोट पहनते ही जाने क्या हो

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं
प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

सुप्रसिद्ध चित्रकार, समाजसेवी एवं
मुख्य संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

पिताजी का कोट सन्तोष कुमार झा अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक कोंकण रेलवे पिता का कोट पहनते ही जाने क्या हो

नव वर्ष 2023 कि शुभकामनाएं- शुभारम्भ है शुभारम्भ हैलुका छिपी सूरज की बहुत ठंड है।। शुभारम्भ है शुभारम्भ

तिलका छंद “युद्ध” गज अश्व सजे।रण-भेरि बजे।।रथ गर्ज हिले।सब वीर खिले।। ध्वज को फहरा।रथ रौंद धरा।।बढ़ते जब ही।सिमटे
मानव छंद “नारी की व्यथा” आडंबर में नित्य घिरा।नारी का सम्मान गिरा।।सत्ता के बुलडोजर से।उन्मादी के लश्कर से।।

राम तो जीवन मूल्यों का नामराम धर्म धैर्य का मान।।राम विशुद्ध सात्विक संस्कारराम राम से प्रणाम।।राम राम राम