न्यू मीडिया में हिन्दी भाषा, साहित्य एवं शोध को समर्पित अव्यावसायिक अकादमिक अभिक्रम

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

सृजन ऑस्ट्रेलिया | SRIJAN AUSTRALIA

विक्टोरिया, ऑस्ट्रेलिया से प्रकाशित, विशेषज्ञों द्वारा समीक्षित, बहुविषयक अंतर्राष्ट्रीय ई-पत्रिका

A Multidisciplinary Peer Reviewed International E-Journal Published from, Victoria, Australia

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं
प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

श्रीमती पूनम चतुर्वेदी शुक्ला

सुप्रसिद्ध चित्रकार, समाजसेवी एवं
मुख्य संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

Category: काव्य धारा

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संवाद होना चाहिए…!!

रिश्तों की डोर में,हो तनाव जब ज्यादा,टूटने को आतुर,और खिचाव हो ज्यादा, बादलों का क्षितिज पर,इक झुकाव होना

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पिता…!!!

पिता…!!! विघ्न चुन लिए सभी,पथ सुपथ भी कर दिया,कठिनाइयों की चादरों को,खुद वरण ही कर लिया…! स्वयं को

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अधूरा प्रेम.!!

अधूरा प्रेम…!!! बंजर मन के इस उपवन को,मैं सींच सींच कर हार गया…!उत्साह प्रेम जो हृदय बसा,थक कर

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चलते रहना ही जीवन है…!

शीर्षक : “चलते रहना ही जीवन है” देख हिमालय सी कठिनाई,क्यूं राहों का परित्याग किया,अथक परिश्रम करते करते,बढ़ते

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बस यूं ही…!

देखो ढल गया है दिन…और शायद तुम भी…मेरे जीवन में…! पर इक आस तो बाकी है…शायद…फिर से निकले

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सवाल…!!!

आज फिर तेरा खयाल आया,बेवजह मन में इक सवाल आया…! कल साथ थे जो गर,अब दूर कैसे हो…?है

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बचपन…!!!

जब अभाव के सागर में,संघर्ष पिता का अथक रहा,खुद के सुख से हर क्षण उनका,जीवन जैसे हो पृथक

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