न्यू मीडिया में हिन्दी भाषा, साहित्य एवं शोध को समर्पित अव्यावसायिक अकादमिक अभिक्रम

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

सृजन ऑस्ट्रेलिया | SRIJAN AUSTRALIA

विक्टोरिया, ऑस्ट्रेलिया से प्रकाशित, विशेषज्ञों द्वारा समीक्षित, बहुविषयक अंतर्राष्ट्रीय ई-पत्रिका

A Multidisciplinary Peer Reviewed International E-Journal Published from, Victoria, Australia

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं
प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

श्रीमती पूनम चतुर्वेदी शुक्ला

सुप्रसिद्ध चित्रकार, समाजसेवी एवं
मुख्य संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

Category: काव्य धारा

Categories

थर्ड जेंडर

  तुम क्या कहोगे मुझे?  पहचान के लिए एक अदना सा शब्द तो दे ना सके और दे

Read More »

सौ सौ अफसाने हैं

नवगीत सबका अपना तौर-तरीकासबके अपने पैमाने हैं। हैं कई सभ्यताएँऔर उनमें संघर्ष है।कैसे होगा फिरइंसानियत का उत्कर्ष है।।

Read More »

अफलातून लगा है

22 22 22 22ग़ज़ल वह तो अफलातून लगा है।पशुता गर नाखून लगा है।। भ्रष्टाचार बढ़ाने वाले,उनके मुँह में

Read More »

अफलातून लगा है

22 22 22 22ग़ज़ल वह तो अफलातून लगा है।पशुता गर नाखून लगा है।। भ्रष्टाचार बढ़ाने वाले,उनके मुँह में

Read More »

जैसे हबूब गया

  नवगीत-जैसे हबूब गया   सूरज निकला सुबह-सुबह शाम को डूब गया।   किरणों ने  दुनिया में धूप

Read More »

यातायात

  यातायात-नवगीत   यातायात मन में दु:ख-विषाद का चल रहा है।   जगह-जगह हो रही दुर्घटना है। हो

Read More »
हाईकु
rnbanyala

हाइकु

माँ हो कर ही जाना जा सकता है माँ का होना भी ।   काँधे पे पेट सिर

Read More »

कस्तूरी

कस्तूरी मेरी ‘कस्तूरी’ मुझे देती रही भटकन ……… उम्रभर जो मरा तो जाना कि मारा भी गया इसी

Read More »
नई कविता
sohalgurdeepsingh

मंदिर मस्जिद का बनना

मंदिर मस्जिद का बनना। दुनियां में सरेआम हुआ।। आदमी बन न सका बंदा। रब्ब यूं ही बदनाम हुआ।।

Read More »
error: Content is protected !!