Category: शोध पत्र
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इंदौर में 30–31 मार्च को साहित्यिक पत्रिकाओं का राष्ट्रीय समागम, देशभर के संपादक होंगे शामिल
इंदौर में 30–31 मार्च को साहित्यिक पत्रिकाओं का राष्ट्रीय समागम, देशभर के संपादक होंगे शामिल डॉ. विकास दवे

हमें बाल मन को पढ़ने की बहुत ज्यादा जरूरत
🔹‘गली बचपन की’ विषय पर राष्ट्रीय बाल साहित्य संगोष्ठी में जुटे देशभर के बाल रचनाकार🔹साहित्य अकादमी मप्र के


हिन्दी का वैश्विक फलक और जनसंचार माध्यम
हिन्दी का वैश्विक फलक और जनसंचार माध्यम सूरज के प्रसाद भाषाविद् हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय ईमेल पता

मानवीय एवं सामाजिक संवेदनाओं के आइने में पाटण की सांस्कृतिक विरासत पटोला हस्तकला एवं हस्तकला कारीगरः एक अध्ययन
मानवीय एवं सामाजिक संवेदनाओं के आइने में पाटण की सांस्कृतिक विरासत पटोला हस्तकला एवं हस्तकला कारीगरः एक अध्ययन

अंतरराष्ट्रीय शोध आलेख प्रतियोगिता
अंतरराष्ट्रीय शोध आलेख प्रतियोगिता उद्देश्य हिंदी पत्रकारिता के 200वें वर्ष के सुअवसर पर न्यू मीडिया सृजन संसार ग्लोबल

मीना कुमारी नाज़ की शायरी
मीना कुमारी नाज़ की शायरीडॉ. वसीम अनवर सहायक प्राध्यापक उर्दू एवं फारसी विभाग डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर,

मोहन राकेश के नाटकों में अभिनेयता
मोहन राकेश ने नाटकों में ‘रंगमंच संप्रेषण’ का पूरा ध्यान रखा है। नाट्य लेखन में राकेश ने नए-नए प्रयोग किए है। जैसे- दृश्यबंध, अभिनेयता, ध्वनियोजना, प्रकाश योजना, गीत योजना, रंग-निर्देश के साथ-साथ भाषा के स्तर पर परिवर्तन के कारण नाटक को सजीव रूप मिला है। इसी कारण नाटकों में अभिनेयता अधिक रूप में फली फुली है। राकेश ने उपन्यास, कहानी संग्रह, नाटक, निबंध, एकांकी आदि विधाओं में कलम चलाई है। लेकिन नाट्य साहित्य में जो प्रसिद्धि मिली शायद किसी नाटककारों को मिली होगी। इसमें ‘आषाढ़ का एक दिन’ (1958), ‘लहरों के राजहंस’ (1963) और ‘आधे अधूरे’ (1969) में अभिनेयता को स्पष्ट करने का प्रयास किया है।
अनुवाद : संकल्पना एवं स्वरूप
‘अनुवाद’ शब्द अंग्रेजी के ‘Transalation’ शब्द के लिए हिंदी पर्याय के रूप में चर्चित है| इसका अर्थ है


