न्यू मीडिया में हिन्दी भाषा, साहित्य एवं शोध को समर्पित अव्यावसायिक अकादमिक अभिक्रम

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

सृजन ऑस्ट्रेलिया | SRIJAN AUSTRALIA

विक्टोरिया, ऑस्ट्रेलिया से प्रकाशित, विशेषज्ञों द्वारा समीक्षित, बहुविषयक अंतर्राष्ट्रीय ई-पत्रिका

A Multidisciplinary Peer Reviewed International E-Journal Published from, Victoria, Australia

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं
प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

श्रीमती पूनम चतुर्वेदी शुक्ला

सुप्रसिद्ध चित्रकार, समाजसेवी एवं
मुख्य संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

Category: काव्य धारा

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ग़ज़ल
nandlalmanitripathi

शराब कहते है

हलक को जलाती ,उतरती हलक में शराब कहते है।।लाख काँटों की खुशबू गुलाब कहते है।।छुपा हो चाँद जिसके

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ग़ज़ल
nandlalmanitripathi

अल्फ़ाज़

  जुबां तोल, मोल , बेमोल,अनमोल, बहारों के फूलों कि बारिश अल्फ़ाज़। तनहा इंसान का अफसोस हुजूम के

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काव्य धारा
nandlalmanitripathi

पानी

  मर जाता आँख का पानीइंशा शर्म से पानी पानी।आँखों से बहता नीर नज़र काआँसू पानी ही पानी।।

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नई कविता
nandlalmanitripathi

बलिदान दिवस और आज का युवा

युवा आम सभी होतेकुछ कर गुजरने की अभिलाषावाले विरले ही होते।।राष्ट्र समाज की चेतना जागरणपर मर मिटते वाले

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नई कविता
nandlalmanitripathi

गंगा

  जय गंगे माता ,निश दिन जो तुझेधता सुख संपत्ति पाता ।। मईया जय गंगे माता ।।ब्रह्मा के

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नई कविता
nandlalmanitripathi

विश्व पर्यावरण

—– – विश्व पर्यावरण — पर्यावरण प्रदूषण प्राणी प्राण कि आफत ब्रह्ममाण्ड के दुश्मन।नदियां ,झरने ,तालाब ,ताल तलइया

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काव्य धारा
sandeepk62643

बिना तेरे

तेरा हो जाऊँ तेरा हो जाऊँ तेरी बाहों के सिरहाने पे, सर रख कर सो जाऊँ ।तेरे हसीं

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नई कविता
nandlalmanitripathi

वक्त की कद्र

वक्त को जान इंसानमत जाया होने दे कर वक्त की कद्र बन कद्रदानवक्त के इम्तेहान सेना हो परेशान।।वक्त

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नई कविता
nandlalmanitripathi

वक्त की क्या बात

वक्त की क्या बातअच्छों अच्छो कीदिखा देता औकातपल भर में रजा रंकफकीर वक्त की तस्वीर।।वक्त किसी का गुलाम

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