Category: काव्य धारा
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तिलका छंद “युद्ध”
तिलका छंद “युद्ध” गज अश्व सजे।रण-भेरि बजे।।रथ गर्ज हिले।सब वीर खिले।। ध्वज को फहरा।रथ रौंद धरा।।बढ़ते जब ही।सिमटे
August 5, 2021
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June 11, 2021
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June 11, 2021
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रोला छंद “शाम’
(रोला छंद) रवि को छिपता देख, शाम ने ली अँगड़ाई।रक्ताम्बर को धार, गगन में सजधज आई।।नृत्य करे उन्मुक्त,
May 27, 2021
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