अरमानों की गाँठ
(एक स्त्री का सामाजिक जीवन परिवार की जिम्मेदारियों के सान्निध्य में घिरा होता है, स्त्री अपने पारिवारिक सदस्यों के अरमानों को सजाने के लिए निस्वार्थ लाभार्थी बनकर तत्पर लगी रहती है, अपने अरमानों की गाँठ समेटे हुए हैं । सभी स्त्रियों को समर्पित हैं – अरमानों की गाँठ)
हर बार बाँध लेती
पल्लू में गाँठ अपने
समेट रही हो जैसे
आधे अधूरे सपने
खुल न जाए गाँठ कभी
इस कदर उसको कसती है
एक छोटी सी गाँठ में
अरमान छिपाए रखती है
सुबह से लेकर रात ढले
घर भर को जीवन देती है
अपने बच्चों कि खातिर
खुद को तर्पण करती है
अपनों के जब हो सपने
हो परेशान जब उनके अपने
घर भर की ले जिम्मेदारी
शिकायत कभी न करती है
उठती सबसे पहले घर में
देर तक फिर जगती है
सबकी सुविधाओं को देखे
गाँठ फिर जोर से कसती है
अपना माथा तप रहा
ध्यान कहाँ ही रखती है
कर्तव्य मार्ग बढ़ती जाती
ममता से सबको ढकती है
बाबा की बिटिया ने भी
कुछ ख्वाब संजोए थे अपने
याद कभी जो आए तो
निहार वो घर को लेती है
हर पल सबको तैयार खड़ी
मुँह आह कभी न सुनती है
मन कभी जो भटके भी तो
फिर गाँठ बाँधकर चलती है
कवयित्री परिचय –
मीनाक्षी डबास “मन”
प्रवक्ता (हिन्दी)
राजकीय सह शिक्षा विद्यालय पश्चिम विहार, शिक्षा निदेशालय राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, दिल्ली भारत
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माता -पिता – श्रीमती राजबाला श्री कृष्ण कुमार
प्रकाशित रचनाएं – घना कोहरा, रिमझिम मोबाइल देवता,4 नया सवेरा (हाईकू), 5 बादल, 6 मेरी सहेलियां भाग -1, 7 शब्द संसार, 8 मेरी सहेलियां भाग- 2, 9 पगडंडियां, 10 मजदूरों की मजदूरी, 11 सीढ़ी, 12 धागा, 13 स्त्रियों के बाल, 14 रेखाओं में मजदूर, 15 वीर राणा प्रताप, 16 भारत के पूत, 17 नवजीवन वरदान, 18 कोरोना काल, 19 गढ़वाल राइफल का वीर 20 मृग तृष्णा,21 बन शक्ति,22 शाख से छूटा पत्ता,23 लो थाम प्रिय, 24 बेटी, 25 मुझे उस ओर जाना है, 26 कौन हो तुम, 27 प्रिय छवि, 28 कुछ कोलाब, 29 मेरे राम, 30कौन दिसा के वासी तुम?,31 अरमानों की गाँठें,32नेता जी
उद्देश्य – सरकारी कार्यालयों में कामकाज की प्राथमिक भाषा बनाने हेतु हिंदी का प्रचार – प्रसार l
Last Updated on May 25, 2021 by mds.jmd
- मीनाक्षी डबास "मन"
- प्रवक्ता (हिन्दी)
- शिक्षा निदेशालय राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, दिल्ली भारत
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- राजकीय सह शिक्षा विद्यालय पश्चिम विहार, दिल्ली भारत








2 thoughts on “अरमानों की गाँठ”
Nice mam
Bhut badia