हिन्दी पत्रकारिता के 200 वर्ष : भोपाल में जुटेंगे देश-विदेश के मनीषी, समकालीन चुनौतियों और भविष्य पर होगा व्यापक विमर्श
भोपाल। हिन्दी पत्रकारिता के द्विशताब्दी वर्ष के ऐतिहासिक अवसर पर मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल 10 और 11 जुलाई 2026 को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के हिन्दी पत्रकारिता विमर्श का साक्षी बनने जा रही है। रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय, भोपाल, स्कोप ग्लोबल स्किल्स विश्वविद्यालय तथा विश्वरंग फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी “समकालीन हिन्दी पत्रकारिता : परम्परा, परिवर्तन और भविष्य” में देश-विदेश के प्रतिष्ठित पत्रकार, शिक्षाविद, साहित्यकार, मीडिया विशेषज्ञ, शोधकर्ता और विद्यार्थी एक मंच पर एकत्र होकर हिन्दी पत्रकारिता की दो शताब्दियों की यात्रा, वर्तमान चुनौतियों तथा भविष्य की संभावनाओं पर विचार-मंथन करेंगे।
यह संगोष्ठी ऐसे समय आयोजित हो रही है जब हिन्दी पत्रकारिता अपने 200 वर्ष पूरे कर रही है। वर्ष 1826 में पंडित जुगल किशोर शुक्ल द्वारा प्रकाशित ‘उदन्त मार्तण्ड’ से प्रारम्भ हुई हिन्दी पत्रकारिता ने भारतीय समाज में राष्ट्रीय चेतना, स्वतंत्रता आंदोलन, सामाजिक सुधार, लोकतांत्रिक मूल्यों और भारतीय भाषाई अस्मिता के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। बदलते तकनीकी परिदृश्य, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), डिजिटल मीडिया, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, डेटा पत्रकारिता तथा सूचना की तीव्र गति के बीच पत्रकारिता के मूल्यों, विश्वसनीयता और सामाजिक दायित्वों पर गंभीर विमर्श की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। यही इस संगोष्ठी का मूल उद्देश्य भी है।
संगोष्ठी की औपचारिक शुरुआत 9 जुलाई की संध्या रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय के रवीन्द्र भवन में आयोजित सांस्कृतिक प्रस्तुति “स्वाधीनता के गान” से होगी। इस विशेष कार्यक्रम के माध्यम से स्वतंत्रता आंदोलन और राष्ट्रचेतना से जुड़े गीतों एवं सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों का मंचन किया जाएगा, जिससे हिन्दी पत्रकारिता और राष्ट्रीय जागरण के ऐतिहासिक संबंधों को सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत किया जा सके।
10 जुलाई को उद्घाटन सत्र के साथ संगोष्ठी के अकादमिक कार्यक्रम प्रारम्भ होंगे। प्रथम सत्र “समकालीन हिन्दी पत्रकारिता : परम्परा, परिवर्तन और भविष्य” विषय पर केन्द्रित रहेगा, जिसमें वरिष्ठ पत्रकार विजयदत्त श्रीधर, ओम भारती तथा विजय मनोहर तिवारी सहित अनेक विशेषज्ञ हिन्दी पत्रकारिता की ऐतिहासिक यात्रा और बदलते स्वरूप पर अपने विचार रखेंगे। इसके बाद आयोजित दूसरे सत्र “मुख्यधारा की हिन्दी पत्रकारिता में साहित्य का स्थान” में साहित्य और पत्रकारिता के अंतर्संबंधों, रचनात्मक लेखन तथा जनसंचार में साहित्यिक मूल्यों की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।
दोपहर के बाद संगोष्ठी परिसर में विशेष प्रदर्शनी का उद्घाटन किया जाएगा। इस अवसर पर पत्रिका ‘बनमाली’ का लोकार्पण, रंग संवाद, विशेष संवाद तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी आधारित प्रकाशनों की प्रदर्शनी आयोजित होगी। इसके पश्चात “समकालीन हिन्दी साहित्यिक पत्रकारिता का परिदृश्य और बनमाली कथा” विषय पर आयोजित सत्र में साहित्यिक पत्रकारिता की बदलती प्रवृत्तियों, पत्रिकाओं की भूमिका तथा सांस्कृतिक पत्रकारिता पर विमर्श होगा। दिन के अंतिम अकादमिक सत्र “वर्तमान परिप्रेक्ष्य में विज्ञान पत्रकारिता” को समर्पित रहेगा, जिसमें विज्ञान संचार, तकनीकी पत्रकारिता तथा वैज्ञानिक विषयों को सरल भाषा में समाज तक पहुँचाने की चुनौतियों और संभावनाओं पर विशेषज्ञ अपने विचार रखेंगे।
इसी दिन विश्वविद्यालयी विद्यार्थियों के लिए विशेष शोध संगोष्ठी भी आयोजित की जाएगी, जिसमें विभिन्न विश्वविद्यालयों के शोधार्थी हिन्दी पत्रकारिता और मीडिया अध्ययन से संबंधित अपने शोधपत्र प्रस्तुत करेंगे। यह सत्र युवा शोधकर्ताओं को वरिष्ठ विद्वानों के साथ संवाद का अवसर प्रदान करेगा और नए शोध विमर्शों को प्रोत्साहित करेगा।
11 जुलाई को संगोष्ठी का दूसरा दिन संस्कृति, रंगमंच, वैश्विक हिन्दी पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया जैसे समकालीन विषयों को समर्पित रहेगा। प्रथम सत्र “पत्रकारिता की मुखरता में संस्कृति और कलाएँ” विषय पर आयोजित होगा, जिसमें सांस्कृतिक पत्रकारिता, कला विमर्श और मीडिया की सामाजिक भूमिका पर विचार होगा। इसके बाद “रंगमंच : संस्कृति और सृजन” विषय पर आयोजित सत्र में रंगकर्म और पत्रकारिता के अंतर्संबंधों पर चर्चा की जाएगी।
दूसरे दिन का प्रमुख आकर्षण “विदेश में हिन्दी पत्रकारिता : अतीत, वर्तमान और भविष्य” विषयक विशेष अंतरराष्ट्रीय सत्र होगा। इस सत्र की अध्यक्षता नवीनचन्द्र लोहनी करेंगे। इसमें जवाहर कर्णावत, आनन्द वर्धन, यूरी बोतिविकिन, राकेश पाण्डेय, डॉ. शैलेश शुक्ला, शालिनी वर्मा तथा संजय सिंह राठौर जैसे वक्ता विदेशों में हिन्दी पत्रकारिता के विकास, भारतीय प्रवासी समाज की भूमिका और वैश्विक हिन्दी मीडिया की संभावनाओं पर अपने विचार प्रस्तुत करेंगे। वहीं ब्रिटेन, यूरोप और अन्य देशों से तेजेन्द्र शर्मा, अनिल जोशी, डॉ. वेद प्रकाश सिंह, रोहित हैप्पी तथा रमा तक्षक ऑनलाइन माध्यम से सहभागिता करते हुए वैश्विक हिन्दी पत्रकारिता के अनुभव साझा करेंगे। इसी अवसर पर “विदेश में हिन्दी पत्रकारिता” विषय पर विशेष प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी, जिसमें प्रवासी हिन्दी पत्रकारिता के ऐतिहासिक दस्तावेज, दुर्लभ प्रकाशन और शोध सामग्री प्रदर्शित की जाएगी।
संगोष्ठी का समापन “डिजिटल पत्रकारिता : तकनीक एवं चुनौतियाँ” विषयक सत्र के साथ होगा। इस सत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल न्यूज़रूम, सोशल मीडिया, तथ्य-जाँच, साइबर सुरक्षा, डिजिटल विश्वसनीयता तथा बदलते मीडिया पारिस्थितिकी तंत्र पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। विशेषज्ञ यह भी बताएंगे कि तकनीकी नवाचारों के बीच पत्रकारिता की विश्वसनीयता, नैतिकता और जनपक्षधरता को किस प्रकार सुरक्षित रखा जा सकता है।
आयोजकों का मानना है कि हिन्दी पत्रकारिता के 200 वर्ष केवल गौरवशाली इतिहास का उत्सव नहीं हैं, बल्कि आत्ममंथन और भविष्य की दिशा निर्धारित करने का अवसर भी हैं। देश और विदेश के प्रतिष्ठित विद्वानों की सहभागिता से यह संगोष्ठी हिन्दी पत्रकारिता के समक्ष उपस्थित समकालीन चुनौतियों, बदलते वैश्विक मीडिया परिदृश्य और नई तकनीकों के प्रभाव पर सार्थक विमर्श का मंच बनेगी। साथ ही, यह आयोजन हिन्दी भाषा, भारतीय ज्ञान परम्परा और पत्रकारिता के लोकतांत्रिक मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुँचाने तथा भविष्य की पत्रकारिता के लिए वैचारिक आधार तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध होने की अपेक्षा रखता है।
Last Updated on July 8, 2026 by srijanaustralia
- डॉ. शैलेश शुक्ला
- प्रधान संपादक
- सृजन ऑस्ट्रेलिया अंतरराष्ट्रीय पत्रिका
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- आशियाना, लखनऊ, उत्तर प्रदेश








