Category: काव्य धारा
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नई कविता
चंद्र मोहन किस्कू की कविता – ‘शायद तुम्हारे लिए आनंद हैं’
पेट की गड्ढे को भरने
जलती आग को
बुझाने के लिए
तुमसे कितना प्रार्थना किया
एक मुट्ठी भोजन के लिए
बार -बार गया तुम्हारे पास
पर तुम
बचा हुआ भोजन को
अधखाया और जूठन को
मुझे देने में
तुम्हे नागवार लगा
January 1, 2021
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December 31, 2020
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December 31, 2020
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December 31, 2020
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अन्य काव्य विधाएं
जिन्दगी की शाम पर : मुसकराना है ,हाथ में हाथ डालकर
<span;>जिन्दगी की शाम पर: मुस्कुराना है हाथ में हाथ डालकर<span;>,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,<span;>जब से जीवन की डोरी से,मैंने <span;>तेरे साथ का
December 27, 2020
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मेरे अपनों को शिकायत रहती है
जब देर रात तक,भीगी पलकों से,जागती रहती हूं,तो मेरे अपनों को शिकायत रहती है। कभी मेरी तन्हाई,मुझसे रूठ
December 22, 2020
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अन्य काव्य विधाएं
जब दहलीज पर आऊँ
जब दहलीज पर आऊँ <span;>,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, <span;>जब हम रवि सा दिन भर संतप्त हो,<span;>त्रसित संध्या की दहलीज पर आऊँ,<span;>तो
December 19, 2020
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