
बेटी और नारी अंतराष्ट्रीय महिला दिवस प्रतियोगिता हेतु
1–बेटी और नारी नन्ही परी की किलकारीगूंजे घर मन आँगना।।कहता कोई गृहलक्ष्मीआयी घर आँगन की गहना।।बेटी आज बराबर

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं
प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

सुप्रसिद्ध चित्रकार, समाजसेवी एवं
मुख्य संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

1–बेटी और नारी नन्ही परी की किलकारीगूंजे घर मन आँगना।।कहता कोई गृहलक्ष्मीआयी घर आँगन की गहना।।बेटी आज बराबर

नारी के रुप अनेकों नारी से नश्वर संसारनारी शक्ति से अर्धनारीश्वर भगवान।। नारी की महिमा अपरंपारदेव ना पावे

प्यार बड़ा-छोटा काला-गोरामोटा-पतलाअमीर-गरीबहर किसी को हो सकता है-किसी से प्यार ,यह ना माने सरहदें, ना देखे दरो-दीवार,हंसी-बदसूरत,बुढ़ा-जवान,तंदरूस्त-बीमार,यहाँ सबके