महिला दिवस
शिर्षक: लोग तो कहेंगे, लोगों का क्या?
कल पापा की सायकिल की सीट पर बैठ कर तो गई थी,
आज़ दोस्त की मोटरसाइकिल पर बैठ कर आई तो क्या हो गया?
कल परिवार के साथ पिकनिक तो मना रही थी,
आज सहेलियों के साथ फिल्म देखने चली गई तो क्या हो गया?
कल रसोईघर में खाना भी तो बना रही थी,
आज ओफिस के कंम्पयूटर पर काम करने लगी तो क्या हो गया?
कल सास की भजन मंडली घर पर बुलाई तो थी
आज किट्टी पार्टी करने चली गई तो क्या हो गया?
लोगों का क्या है,लोग तो कहेंगे!
– रंजना सोलंकी भगत ‘रोशनी’
Last Updated on March 6, 2021 by ranjanabhagat70
- रंजना सोलंकी भगत
- लेखिका
- जागृति साप्ताहिक
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- C/503, राधे किशन रेसिडेंसी कर्नावती मोल वस्त्राल अहमदाबाद गुजरात भारत







