नारी के रुप अनेकों
नारी से नश्वर संसार
नारी शक्ति से अर्धनारीश्वर भगवान।।
नारी की महिमा अपरंपार
देव ना पावे पार मानव की
क्या बिसात।।
बेटी बढती पढ़ती नारी का
बचपन बेटी ही बहन माँ भगिनी
अर्धाग्नि रिश्तों का संसार।।
पुरुष प्रधान समाज मे नारी
पर होते अत्याचार
चाहे बचपन की बेटी हो या
युवा पल प्रहर भयाक्रांत।।
सत्य यह भी बेटी नारी स्त्री
पर जो भी होते अत्याचार
बेटी नारी स्त्री की होती
बराबर की हिस्सेदार।।
बेटी कोख में मारी जाती
होती नारी की ही कोख।।
कभी सहमति कभी असहमति
कन्या भ्रूण की हत्याएं किस
किस पर दे दोष।।
दहेज का दानव बेटियों
की बलि चढ़ाता माँ बाप
को कायर कमजोर बनाता।।
तब भी एक नारी होती
सासु माँ माँ के संबंधों
में भय भयंकर भारी होती।।
बेटी अबला नारी असहाय
दुख पीड़ा की मारी होती।।
अंधी गलियों की बेगम रानी
नारी दूजे नारी की दहसत दंश
दर्द की हिस्सेदारी होती।।
जिस्मफरोसी के धंधे की ठग
ठगनी नारी होती।।
बेटी नारी की दुर्दशा में नारी
पुरुषों की बराबर की भागिदारी होती।।
बिन नारी के सहमति से नही ताकत
पुरुषों में नारी बेटी का अपमान हो संभव।।
लोहे को लोहा ही कटता नारी नारी
की आरी होती।।
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
Last Updated on March 8, 2021 by nandlalmanitripathi
- नंन्दलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
- प्राचार्य
- भारतीय जीवन बीमा निगम
- [email protected]
- C-159 दिव्य नगर कॉलोनी पोस्ट-खोराबार जनपद-गोरखपुर -273010 उत्तर प्रदेश भारत







