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डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

सृजन ऑस्ट्रेलिया | SRIJAN AUSTRALIA

विक्टोरिया, ऑस्ट्रेलिया से प्रकाशित, विशेषज्ञों द्वारा समीक्षित, बहुविषयक अंतर्राष्ट्रीय ई-पत्रिका

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डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं
प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

श्रीमती पूनम चतुर्वेदी शुक्ला

सुप्रसिद्ध चित्रकार, समाजसेवी एवं
मुख्य संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

जैसे हबूब गया

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नवगीत-जैसे हबूब गया

 
सूरज निकला सुबह-सुबह
शाम को डूब गया।
 
किरणों ने 
दुनिया में
धूप की चादर फैलाई।
संगीत फूटा 
निर्झर से
कल-कल की ध्वनि आई।।
 
ये कैसी चहल-पहल थी कि
मन ही ऊब गया।
 
हवाएँ बर्फीली
तन में
सुईयाँ चुभाएँगी।
चिड़ियाँ गुम्बद पर
सुबह-सुबह
प्रभाती गाएँगी।।
 
धुला-धुला सा मौसम है
जैसे हबूब गया।
 
अंबर से बहारें
अप्सरा सी
बाग में उतरीं।
आज वसुंधरा
लग रही है
बिल्कुल साफ-सुथरी।।
 
और प्रेयसी के जीवन से
है महबूब गया।
 
अविनाश ब्यौहार
जबलपुर मप्र
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

Last Updated on November 19, 2021 by a1499.9826795372

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