न्यू मीडिया में हिन्दी भाषा, साहित्य एवं शोध को समर्पित अव्यावसायिक अकादमिक अभिक्रम

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

सृजन ऑस्ट्रेलिया | SRIJAN AUSTRALIA

विक्टोरिया, ऑस्ट्रेलिया से प्रकाशित, विशेषज्ञों द्वारा समीक्षित, बहुविषयक अंतर्राष्ट्रीय ई-पत्रिका

A Multidisciplinary Peer Reviewed International E-Journal Published from, Victoria, Australia

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं
प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

श्रीमती पूनम चतुर्वेदी शुक्ला

सुप्रसिद्ध चित्रकार, समाजसेवी एवं
मुख्य संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

01 आ गया वसंत, 02 बसंत बहार, 03 ऋतु परिवर्तन { प्रेम काव्य लेखन प्रतियोगिता }

Spread the love
image_pdfimage_print

01 आ गया वसंत

आ  गया वसंत ! देखो फिर छा गया वसंत !!

अब होगा कलरव चहूँ – दिशा में ,

वन – वन खिल जायेंगे फूल |

जीवित होंगे घर-आँगन- वन निद्रित शैल अलसेंगे |

दिवामणि के दिव्य प्रताप से , नव – कलिका नव किसलय दल

मदिर – मदिर मुस्कायेंगे ||

दिशा – दिशा  में फिर सौरभ के धूमिल मेघ उठेंगे  |

अब रसाल की आम्र मंजरी में,  कोयल के मधुर सुर कूजेंगे ||

डाल – डाल औ पात – पात में होगा नव जीवन का सृजन ,

जब नव नीड़ में युगल  द्विज  का  फिर हो  जायेगा  मिलन  ||

वसुधा के कण – कण गूंजेगा नव जीवन का संगीत |

जब पग–पग विस्तारित हरियल दूर्वा भरेगी, ॐ –ओमकार का स्वर  ||

मधुमास की मादकता में समीरण हो जायेगा अधीर ,

सानन्द रोएगी हिमानी कभी चुम्बन से जाएगी सिंहर |

आ गया वसंत  ! देखो फिर छा गया वसंत  !!

02 ऋतु परिवर्तन

पूस शिशिर की जटिल राह से , प्रकृति ने ली अंगड़ाई।
सर्द रात से सबको उसने ,आज है राहत दिलवाई।
बसंत बहार की चादर ओढ़े , ऋतुओं की रानी शरमाई।
बासंती पुष्प की रंगत उसने ,प्रकृति के कण-कण में फैलाई।
देख परिवर्तन की अद्भुत लीला, मानव जाति हरषाई।
विगत क्षणों की यादें लेकर , ऐसी सुघड़ी आयी
वसंतोत्सव की अद्भुत बेला, प्रकृति में पुनः बन आई।
स्वागत करने जन-मानस का, पीली बहार है छायी ,
झंकृत हृदय के तार हैं गाते ,स्वागत स्वागत स्वर्णागत।
स्वागत की सु-मधुर बेला में ,लगते सभी जाने पहिचाने ,
विधि की कैसी अद्भुत लीला ,परिवर्तन हुआ साकार।
परिवर्तन की शुभ बेला ने , दिया जग को  नव-संस्कार ।
धन्यवाद ऋतुओं की रानी का ,आतिथ्य किया स्वीकार।

03 बसंत बहार

आयो सखी ऋतु बसंत राज !
छेड़ो ‘राग बहार’ |
मिल गाओ ‘मियां मल्हार’ ,
जागी रस की फुहार |
सघन -वन- वृक्ष की ऊँची डाल ,
खिल गयो ‘लाल बुरांश’ |
ख़ुशी से फूली ‘पिली सरसों ‘
सृष्टि को दिया नवाकार |
डाल -डाल के अंग-अंग में
नव कोंपल का संचार |
‘गुलाल’ की सौंधी महक से ,
आओ करें अवनि का श्रृंगार ||

Last Updated on January 9, 2021 by diptijoshi2612

  • डा. दीप्ति जोशी गुप्ता
  • पूर्व असिस्टैंट प्रोफ़ेसर
  • पूर्व असिस्टेंट प्रोफ़ेसर राजकीय महाविद्यालय चौखुटिया उत्तराखंड
  • [email protected]
  • वामा डेंटल क्लिनिक, नियर गांधी ग्लाराउंड रोड लाबेला चौक बदायूँ उत्तर प्रदेश
Facebook
Twitter
LinkedIn

More to explorer

fafa

हिंदी पत्रकारिता का वैश्विक विस्तार: विरासत, विकास और भविष्य का विराट विमर्श

Spread the love

Spread the love Print 🖨 PDF 📄 eBook 📱हिंदी पत्रकारिता का वैश्विक विस्तार: विरासत, विकास और भविष्य का विराट विमर्श डॉ. शैलेश

123

हिन्दी पत्रकारिता के 200 वर्ष : भोपाल में जुटेंगे देश-विदेश के मनीषी, समकालीन चुनौतियों और भविष्य पर होगा व्यापक विमर्श

Spread the love

Spread the love Print 🖨 PDF 📄 eBook 📱हिन्दी पत्रकारिता के 200 वर्ष : भोपाल में जुटेंगे देश-विदेश के मनीषी, समकालीन चुनौतियों

Leave a Comment

error: Content is protected !!