वारिस की पहली फुहार में
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जब से तुम परदेशी हो गये,
खूब आते सुनहले सपने में,
सजना,तुम अब होते दीदार,
बस हमारे पलक झपकने में ।1।
हरसिंगार ले के पहला प्यार,
यूँ महकता हमारी तन्हाई में,
बारिश की पहली फुहार पर,
सिहरती हूँ,तब मैं अंगडाई में ।2।
जब ये सारा उपवन सोता है,
सारी रात गंध बन जागती मैं,
मेरे प्यार को तुम क्या जानोगे,
चंदन बन अंग अंग दमकती मैं।3।
रात कहती, तुम सो जाओ अब,
इस घुमड रहे मदमस्ती झोंके में,
रोना और तडपन देख लिया सब,
जमीं पर और इन सजे परकोटे में ।4।
Last Updated on January 9, 2021 by opgupta.kdl
- ओमप्रकाश गुप्ता
- अवकाश प्राप्त प्रवक्ता गणित
- बैलाडिला
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