प्रेम काव्य लेखन प्रतियोगिता हेतु
वारिस की पहली फुहार में
……………………………
जब से तुम परदेशी हो गये,
खूब आते सुनहले सपने में,
सजना,तुम अब होते दीदार,
बस हमारे पलक झपकने में ।1।
हरसिंगार ले के पहला प्यार,
यूँ महकता हमारी तन्हाई में,
बारिश की पहली फुहार पर,
सिहरती हूँ,तब मैं अंगडाई में ।2।
जब ये सारा उपवन सोता है,
सारी रात गंध बन जागती मैं,
मेरे प्यार को तुम क्या जानोगे,
चंदन बन अंग अंग दमकती मैं।3।
रात कहती, तुम सो जाओ अब,
इस घुमड रहे मदमस्ती झोंके में,
रोना और तडपन देख लिया सब,
जमीं पर और इन सजे परकोटे में ।4।