न्यू मीडिया में हिन्दी भाषा, साहित्य एवं शोध को समर्पित अव्यावसायिक अकादमिक अभिक्रम

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

सृजन ऑस्ट्रेलिया | SRIJAN AUSTRALIA

6 मैपलटन वे, टारनेट, विक्टोरिया, ऑस्ट्रेलिया से प्रकाशित, विशेषज्ञों द्वारा समीक्षित, बहुविषयक अंतर्राष्ट्रीय ई-पत्रिका

A Multidisciplinary Peer Reviewed International E-Journal Published from 6 Mapleton Way, Tarneit, Victoria, Australia

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं
प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

श्रीमती पूनम चतुर्वेदी शुक्ला

सुप्रसिद्ध चित्रकार, समाजसेवी एवं
मुख्य संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

काव्य

रमेश कुमार सिंह रुद्र की नई कविता ‘मां सरस्वती’

वीणावादिनी ज्ञानदायिनी ज्ञानवान कर दे…. माँ रूपसौभाग्यदायिनी नव रुप भर दे…. हंसवाहिनी श्वेतांबरी जग उज्ज्वल कर दे….. वीणापाणिनि शब्ददायिनी शब्दों से भर दे…. ज्योतिर्मय जीवन तरंगमय जीवन सभी जन प्रकाशयुक्त …

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नवनीत शुक्ल की कविता – ‘पुस्तक बोली’

बच्चों से इक पुस्तक बोली जितना मुझे पढ़ जाओगे उतने ही गूढ़ रहस्य मेरे बच्चों तुम समझ पाओगे। मुझमें छिपे रहस्य हजारों सारे भेद समझ जाओगे दुनियाँ के तौर-तरीकों से …

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विवेक की चार कविताएं

1  हमने हर मोड़ पर जिसके लिये, ख़ुद को जलाया है। उसी ने छोड़कर हमको, किसी का घर बसाया है।। किया है जिसके एहसासों ने,  मेरी रात को रोशन। सुबह …

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आशा दिलीप की कविता – ‘मेहंदी और जीवन’

जीवन भी कुछ मेहंदी सा हो कष्ट सहे टूटन का पेड़ से सिल पर पिसे दर्द को सह के समेटी जाए पात्र मे पानी संग जो भी छुए उस पर …

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मीनाक्षी डबास ‘मन’ की कविता – ‘स्त्रियों के बाल’

स्त्रियों के बाल कविता है स्वयं जब सुलझाती उनको मानो चुने जा रहे शब्द एक-एक लट की तरह। लहराते हैं जब खुले बाल हवा के संग मानो बहे जाते शब्द …

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संदीप सिंधवाल की कविता – ‘मेरा मैं’

ये जो माटी ढेर है, ‘मैं’ माया का दास। माया गई तो मैं भी, खाक बचा अब पास।। मैं श्रेष्ठ हूं तो सिद्घ कर, मैं अच्छी नहीं बात। सबका मालिक …

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सपना की कविता – ‘बेरोजगार’

बेरोजगार कितना मुश्किल यह स्वीकार हूँ, मैं भी बेरोजगार। सत्य को झुठलाया भी नहीं जा सकता न ही इससे मुँह मोड़ सकती हूँ मैं परम् सत्य तो यही है लाखों …

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आदित्य तिवारी की कविता – ‘समर्पण’

ये जीवन जितनी बार मिले माता तुझको अर्पण है इस जीवन का हर क्षण ,हर पल माता तुझको अर्पण है। यही जन्म नहीं, सौ जन्म भी माता तुझ वारूँ मैं …

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सपना नेगी की कविता – ‘धन्यवाद कोरोना!’

कोरोना ! तुमने हमें बहुत कुछ स्मरण करवा दिया पश्चिमीकरण की चकाचौंध में फंसकर अपनी पुरातन संस्कृति भूल गए थे हम तुमने ही हमारा परिचय पुन: संस्कृति से करवाया। देशी …

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बुद्धि सागर गौतम के दोहे

अभिमान जीवन में अभिमान तुम, कभी न करना भाय। अभिमानी इस जगत में, चैन कभी ना पाय। मानव का अभिमान ही, बहुत बड़ा है दोष। अभिमानी मानव सदा, दे दूजे …

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