प्रेम काव्य प्रतियोगिता हेतु , . प्रणय पत्र
. प्रणय पत्र सोचा आज एक प्रणय पत्र लिखूँ दिल हो कागज़ और काजल हो स्याही कि तुम जब देखो तो तुम्हें देखे मेरी नज़र पर …
. प्रणय पत्र सोचा आज एक प्रणय पत्र लिखूँ दिल हो कागज़ और काजल हो स्याही कि तुम जब देखो तो तुम्हें देखे मेरी नज़र पर …
साँचा बंधन सतवर्णी रंगों से सज कर जब कान्हा तेरी प्रीत खिले राग , अनुराग, भाव, अनुभाव . सब जीवन राधा को मिले अधखुले नयन मद से भरे लरजते …
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस कवि सम्मेलन काव्य प्रतियोगिता केलिए क्या नाम दूँ तुम्हें ? जीना है कब तक देवता का रूप धरकर ? कितनों ने की है दुनिया में …
‘मैं’, मैं को ढूंढ रही थी, नगर-नगर गली, गली, घूम रही थी, ‘मैं’ की तलाश जारी थी, अब खुद के अंदर देखने की बारी थी, कस्तूरी मृग की नाभि में …
‘मैं’, मैं को ढूंढ रही थी, नगर-नगर गली, गली, घूम रही थी, ‘मैं’ की तलाश जारी थी, अब खुद के अंदर देखने की बारी थी, कस्तूरी मृग की नाभि में …
व्यंग्य “पतंग का चस्का और थानेदार साहब का डण्डा “ मकर संक्रांति पर सुबह से ही पतंगबाजी का माहौल था। आसमान में रंग-बिरंगी पतंग, ऊंगलियों के इशारों पर नाच रहीं …
प्रेम कुटीर————- हम कम बोलते हैं आपसे नज़र मिलाते हैं ज्यादाज्यादा कोशिश तो करते हैं पर टिकनहीं पा रहे हैं दिल कमज़ोर है ज्यादा सोचा रोमियो जैसे पीछे पड़ूं !मजुनू …
‘देशभक्ति काव्य लेखन प्रतियोगिता ‘ हेतु प्रेम कविता-शीर्षक: प्रेम कुटीर Read More »
रचना शीर्षक : “प्रणय निवेदन” विचलित से हैं भाव मेरे,तेरे सम्मुख आ जाने आने पर,फेर सको गर नज़रें तुम,कुछ शब्द लिखूं पैमाने पर…! शब्द, शून्य की सीमा पर,कैसे तारीफ के …
अंतरराष्ट्रीय “प्रेम काव्य लेखन प्रतियोगिता” हेतु Read More »
तुमने ये गजरे कयूॅ नहीं लगाये, चंदन सा बदन क्यो नहीं महका, ये जुलफें वैसे कयूॅ नहीँ बलखाई, तेरा चितचोर इसलिए नहीं बहका, ऐ!इत्ती सी बात पर तुम रूठी मुझसे, …
कोने में ,जर्जर सी अकेली खड़ी है,साथियों के साथ एक रैक में पड़ी है।अपने सारे पन्नों को समेटे,ऊपर गंदा सा आवरण लपेटे। थोड़ी बदहवास सी पुरानी लगती है,किसी की …