न्यू मीडिया में हिन्दी भाषा, साहित्य एवं शोध को समर्पित अव्यावसायिक अकादमिक अभिक्रम

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

सृजन ऑस्ट्रेलिया | SRIJAN AUSTRALIA

विक्टोरिया, ऑस्ट्रेलिया से प्रकाशित, विशेषज्ञों द्वारा समीक्षित, बहुविषयक अंतर्राष्ट्रीय ई-पत्रिका

A Multidisciplinary Peer Reviewed International E-Journal Published from, Victoria, Australia

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं
प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

श्रीमती पूनम चतुर्वेदी शुक्ला

सुप्रसिद्ध चित्रकार, समाजसेवी एवं
मुख्य संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

Month: January 2021

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क्यों पढ़े संस्कृत हम

देशभक्ति काव्य – लेखन प्रतियोगिता क्यों पढ़े संस्कृत हम ज्ञान की यह खानसंस्कृति की पहचानभाषाओं की जननीदेवभाषा है महान।गागर में सागर समाहितसदियों से यह आदृत।वेद ऋचाएँ गंगा – सीश्लोकों में …

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प्रेम -काव्य लेखन प्रतियोगिता हेतु

मन महकने लगा, तन बहकने लगा कर दिया कोई जादू तेरे नाम ने,  बंद सी आँख मेरी ये कहने लगी,  तु जरूर आ गई है मेरे सामने।    अब तलक …

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हिन्दी : भारत का अभिमान

हिन्दी : भारत का अभिमान ध्वज हिंदी का चूमता आसमान है अजय हिंदी यह भाषा महान है, पाणिनी की  संस्कृत जन्मदात्री, पाली प्राकृत अपभ्रंश सखी समान है, देवनागरी लिपि ,शब्दों …

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महिला दिवस काव्य प्रतियोगिता

नारी जग की तारिणी नारी जग की तारिणी, नारी जग आधार।नारी जग की शक्ति है, नारी से संसार।।1।। नारी से ही है सुता, नारी से ही मात।नारी बहना रूप है, …

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महिला दिवस काव्य प्रतियोगिता

नारी नारी का सम्मान करो रे, करो नहीं उसका अपमान।ईश्वर की ये अनुपम रचना, मानव जीवन का वरदान।। अस्तित्व नहीं था लहरों का, जलधि यदि नहीं होता आज।शक्ति भक्ति जगत …

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महिला दिवस-2021,काव्य प्रतियोगिता हेतु प्रेषित मेरी प्रविष्टि(कविता)

स्वरचित कविता (महिला काव्य प्रतियोगिता हेतु प्रेषित  प्रविष्टि) शीर्षक-“जाग रहीआधीआबादी” जाग रहीआधीआबादी,दु:ख छिपकर अब सोता है। देश मेरा गर्वित है इनपर,सुख-स्वप्नों में खोता है ।। दिन चमकीले,रात सुहानी,घर-घर गूंजे यही …

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महिला दिवस काव्य प्रतियोगिता हेतु , “स्त्री जीवन का सफर”

“स्त्री जीवन का सफर” पलकों के झपकने में जितना वक्त लगता है उतना ही वक्त लगता है एक स्त्री की जिंदगी को मौत तक पहुँचने में देखिए जरा उसकी हत्या  …

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चलती नहीं हैं

*******************************हो जहाँ मरुथल वहाँ कश्तियाँ चलती नहीं हैं ।हों अपाहिज अश्व तो बग्गियाँ बढ़ती नहीं हैं ।।देख ले करके जतन स्वार्थ की इस जिन्दगी में ,हो भरी यदि रेत कर …

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देशभक्त मां

अंतर्राष्ट्रीय देश भक्ति काव्य लेखन प्रतियोगिता हेतु प्रस्तुत रचना देशभक्त मां**** छाती से आंचल लिपटाकर घूमूं सारे गांव रे।एक दिन आयेगा लाल मेरा मैं बैठी अपनी ठांव रे।रोज सबेरे सूरज …

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