न्यू मीडिया में हिन्दी भाषा, साहित्य एवं शोध को समर्पित अव्यावसायिक अकादमिक अभिक्रम

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

सृजन ऑस्ट्रेलिया | SRIJAN AUSTRALIA

6 मैपलटन वे, टारनेट, विक्टोरिया, ऑस्ट्रेलिया से प्रकाशित, विशेषज्ञों द्वारा समीक्षित, बहुविषयक अंतर्राष्ट्रीय ई-पत्रिका

A Multidisciplinary Peer Reviewed International E-Journal Published from 6 Mapleton Way, Tarneit, Victoria, Australia

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं
प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

श्रीमती पूनम चतुर्वेदी शुक्ला

सुप्रसिद्ध चित्रकार, समाजसेवी एवं
मुख्य संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

Month: December 2020

image_pdfimage_print

महिला दिवस काव्य प्रतियोगिता हेतू कविता : “नारी शक्ति”

नारी शक्ति के क्या कहने, सारे जग में सब जानेसेना हो या हो पुलिस, दौड़ हो या हो अंतरिक्ष! हर जगह लहरा रही, नारी अपना परचमशिक्षा हो या हो मेडिकल, स्थल …

महिला दिवस काव्य प्रतियोगिता हेतू कविता : “नारी शक्ति” Read More »

बस , ऐसी लहर देना है

शब्द तो भाव के भूखे है,  अभाव है,तो पूरी तरह से रखे हैं,  भावना है,तो निश्चित उसमें शक्ति है, शक्ति का मनुहार ही उसकी भक्ति है,  सशक्त संबोधन से संज्ञायूं …

बस , ऐसी लहर देना है Read More »

बस इतना ही बहुत है

भले ही मजधार में,  जीवन की नौका हो, मैं हूँ और तुम भी हो  बस इतना ही बहुत है ।1। नीरव में ठहरी कश्ती,  साहिल का पता नहीँ,  तुम हो …

बस इतना ही बहुत है Read More »

जिन्दगी की शाम पर : मुसकराना है ,हाथ में हाथ डालकर

<span;>जिन्दगी की शाम पर: मुस्कुराना है हाथ में हाथ डालकर<span;>,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,<span;>जब से जीवन की डोरी से,मैंने <span;>तेरे साथ का गठबंधन जोडा है।<span;>चलते इन राहों पे न जाने,कितने<span;>इन सुनामियों ने हमें झिझोडा …

जिन्दगी की शाम पर : मुसकराना है ,हाथ में हाथ डालकर Read More »

हास्य और गाम्भीर्यता की अनूठी रार, गजब… ‘पोली’ और ‘पोली का यार’

सुशील कुमार ‘नवीन ‘ किसी रिपोर्टर ने हरियाणा के रामल से पूछा कि आप लोग बार-बार कहते सुनाई देते हो कि भई, स्वाद आग्या। ये स्वाद क्या बला है और …

हास्य और गाम्भीर्यता की अनूठी रार, गजब… ‘पोली’ और ‘पोली का यार’ Read More »

मेरे अपनों को शिकायत रहती है

जब देर रात तक,भीगी पलकों से,जागती रहती हूं,तो मेरे अपनों को शिकायत रहती है। कभी मेरी तन्हाई,मुझसे रूठ कर,कोने में रोती रहती है,तो मेरे अपनों को शिकायत रहती है। जब …

मेरे अपनों को शिकायत रहती है Read More »

error: Content is protected !!