बसंत (प्रेम गीत प्रतियोगिता)
प्रीत की प्यारी बनके,सबकी दुलारी बन के,मंह-मंह करती,बसंत त्रृतु आ गई। धानी चुनर पहने,उससे मिलन करने,सपने सुहाने ले के,मधुमास को रिझा गई। मंह-मंह करती,बसंत त्रृतु आ गई। कलियों ने राग …
प्रीत की प्यारी बनके,सबकी दुलारी बन के,मंह-मंह करती,बसंत त्रृतु आ गई। धानी चुनर पहने,उससे मिलन करने,सपने सुहाने ले के,मधुमास को रिझा गई। मंह-मंह करती,बसंत त्रृतु आ गई। कलियों ने राग …
कैलिफोर्निया, अमेरिका से प्रो नीलू गुप्ता जी के अध्यक्षता में आयोजित हुए इस कवि सम्मेलन में दुनियाभर से हिन्दी रचनाकार सम्मिलित हुए। मुख्य अतिथि के रूप में प्रो. हितेंद्र मिश्रा, पू. प. विश्वविद्यालय, शिलांग, मेघालय, भारत उपस्थित रहे। यह कवि सम्मेलन विश्व हिंदी सचिवालय, मॉरीशस के महासचिव प्रो. विनोद कुमार मिश्र जी के सान्निध्य संपन्न हुआ जिसमें सृजन ऑस्ट्रेलिया अंतरराष्ट्रीय ई- पत्रिका के प्रधान संपादक श्री शैलेश शुक्ला ने आयोजक और संचालक की भूमिका निभाई।
अकेला विसरा अपनी राहों में चला था, किसी की जरूरत सता रही थी, जिनसे दिल की बातें करूँ, दिल के दर्द बयां करूँ, फिर वो दिन आया जब सब बदल …
माटी-तन चंदन कर दूँगा माटी-तन चंदन कर दूँगा लग जाने दो बस सीने से हृदय वृन्दावन कर दूँगा, छूकर पतित तुम्हारी काया माटी-तन चंदन कर दूँगा। दिल …
प्रेम-काव्य लेखन प्रतियोगिता/ माटी-तन चंदन कर दूँगा Read More »
(महिला-दिवस काव्य प्रतियोगिता हेतु कवितायें) 1 अब तुम्हारे झूठे आश्वासन मेरे घर के आँगन में फूल नहीं खिला सकते चाँद नहीं उगा सकते मेरे घर की दीवार की ईंट …
तुम ईंट फेंकना मैं पुल बनाऊँगी। तुम इस पार रहना मैं उस पार जाऊँगी। तुम बम लगाना मैं पौधे उगाऊँगी।तुम विनाश के गीत गाना मैं पक्षियों का कलरव सुनाऊँगी। तुम्हारी …
अस्तित्व सागर से फिर मुलाकात हुई पहले की तरह करता रहा आकर्षित बाहें पसार कर बुलाता रहा अपने पास मन हो चला नदी-नदी सा बह जाने से पहले ही …
” महिला दिवस काव्य प्रतोयोगिता हेतु कविता ” कविताओं का शीर्षक, ” अस्तित्व ”, ” नदी ”. Read More »
प्रेम— — — —प्रीत पुरातन रीत रही मन मीत नही जग है दुखदाई।खोल कहे मन की जिस बात को प्रेम बिना नजदीक न आई।।प्रेमविहीन जिको उर जानहुँ बंजर खेत समान …
प्रेम— — — —प्रीत पुरातन रीत रही मन मीत नही जग है दुखदाई।खोल कहे मन की जिस बात को प्रेम बिना नजदीक न आई।।प्रेमविहीन जिको उर जानहुँ बंजर खेत समान …
तुम—मुझे अच्छा लगता है जब कोई मुझे तुम कहता है।सुन रहे हो न तुम,मुझे अच्छा लगता है जब कोई मुझे तुम कहता है।क्योंकि मैंतुम में ही तो हूँ,तुम से ही …