न्यू मीडिया में हिन्दी भाषा, साहित्य एवं शोध को समर्पित अव्यावसायिक अकादमिक अभिक्रम

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

सृजन ऑस्ट्रेलिया | SRIJAN AUSTRALIA

विक्टोरिया, ऑस्ट्रेलिया से प्रकाशित, विशेषज्ञों द्वारा समीक्षित, बहुविषयक अंतर्राष्ट्रीय ई-पत्रिका

A Multidisciplinary Peer Reviewed International E-Journal Published from, Victoria, Australia

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं
प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

श्रीमती पूनम चतुर्वेदी शुक्ला

सुप्रसिद्ध चित्रकार, समाजसेवी एवं
मुख्य संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

Month: January 2021

image_pdfimage_print

बसंत (प्रेम गीत प्रतियोगिता)

प्रीत की प्यारी बनके,सबकी दुलारी बन के,मंह-मंह करती,बसंत त्रृतु आ गई। धानी चुनर पहने,उससे मिलन करने,सपने सुहाने ले के,मधुमास को रिझा गई। मंह-मंह करती,बसंत त्रृतु आ गई। कलियों ने राग …

बसंत (प्रेम गीत प्रतियोगिता) Read More »

प्रो नीलू गुप्ता की अध्यक्षता में अंतरराष्ट्रीय कवि सम्मेलन सम्पन्न

कैलिफोर्निया, अमेरिका से प्रो नीलू गुप्ता जी के अध्यक्षता में आयोजित हुए इस कवि सम्मेलन में दुनियाभर से हिन्दी रचनाकार सम्मिलित हुए। मुख्य अतिथि के रूप में प्रो. हितेंद्र मिश्रा, पू. प. विश्वविद्यालय, शिलांग, मेघालय, भारत उपस्थित रहे। यह कवि सम्मेलन विश्व हिंदी सचिवालय, मॉरीशस के महासचिव प्रो. विनोद कुमार मिश्र जी के सान्निध्य संपन्न हुआ जिसमें सृजन ऑस्ट्रेलिया अंतरराष्ट्रीय ई- पत्रिका के प्रधान संपादक श्री शैलेश शुक्ला ने आयोजक और संचालक की भूमिका निभाई।

प्रेम-काव्य लेखन प्रतियोगिता/ माटी-तन चंदन कर दूँगा

  माटी-तन चंदन कर दूँगा   माटी-तन चंदन कर दूँगा लग जाने दो बस सीने से हृदय वृन्दावन कर दूँगा, छूकर पतित तुम्हारी काया माटी-तन चंदन कर दूँगा।   दिल …

प्रेम-काव्य लेखन प्रतियोगिता/ माटी-तन चंदन कर दूँगा Read More »

महिला-दिवस काव्य प्रतियोगिता हेतु कवितायें

(महिला-दिवस काव्य प्रतियोगिता हेतु कवितायें)   1 अब तुम्हारे झूठे आश्वासन मेरे घर के आँगन में फूल नहीं खिला सकते चाँद नहीं उगा सकते मेरे घर की दीवार की ईंट …

महिला-दिवस काव्य प्रतियोगिता हेतु कवितायें Read More »

मेरी मंज़िल

तुम ईंट फेंकना मैं पुल बनाऊँगी। तुम इस पार रहना मैं उस पार जाऊँगी। तुम बम लगाना मैं पौधे उगाऊँगी।तुम विनाश के गीत गाना मैं पक्षियों का कलरव सुनाऊँगी। तुम्हारी …

मेरी मंज़िल Read More »

” महिला दिवस काव्य प्रतोयोगिता हेतु कविता ” कविताओं का शीर्षक, ” अस्तित्व ”, ” नदी ”.

अस्तित्व   सागर से फिर मुलाकात हुई पहले की तरह करता रहा आकर्षित बाहें पसार कर बुलाता रहा अपने पास मन हो चला नदी-नदी सा बह जाने से पहले ही …

” महिला दिवस काव्य प्रतोयोगिता हेतु कविता ” कविताओं का शीर्षक, ” अस्तित्व ”, ” नदी ”. Read More »

“प्रेम-काव्य प्रतियोगिता”

प्रेम— — — —प्रीत पुरातन रीत रही मन मीत नही जग है दुखदाई।खोल कहे मन की जिस बात को प्रेम बिना नजदीक न आई।।प्रेमविहीन जिको उर जानहुँ बंजर खेत समान …

“प्रेम-काव्य प्रतियोगिता” Read More »

“प्रेम-काव्य प्रतियोगिता”

प्रेम— — — —प्रीत पुरातन रीत रही मन मीत नही जग है दुखदाई।खोल कहे मन की जिस बात को प्रेम बिना नजदीक न आई।।प्रेमविहीन जिको उर जानहुँ बंजर खेत समान …

“प्रेम-काव्य प्रतियोगिता” Read More »

प्रेम काव्य अंर्तराष्ट्रीय प्रतियोगिता

तुम—मुझे अच्छा लगता है जब कोई मुझे तुम कहता है।सुन रहे हो न तुम,मुझे अच्छा लगता है जब कोई मुझे तुम कहता है।क्योंकि मैंतुम में ही तो हूँ,तुम से ही …

प्रेम काव्य अंर्तराष्ट्रीय प्रतियोगिता Read More »

error: Content is protected !!