न्यू मीडिया में हिन्दी भाषा, साहित्य एवं शोध को समर्पित अव्यावसायिक अकादमिक अभिक्रम

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

सृजन ऑस्ट्रेलिया | SRIJAN AUSTRALIA

विक्टोरिया, ऑस्ट्रेलिया से प्रकाशित, विशेषज्ञों द्वारा समीक्षित, बहुविषयक अंतर्राष्ट्रीय ई-पत्रिका

A Multidisciplinary Peer Reviewed International E-Journal Published from, Victoria, Australia

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं
प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

श्रीमती पूनम चतुर्वेदी शुक्ला

सुप्रसिद्ध चित्रकार, समाजसेवी एवं
मुख्य संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

बसंत (प्रेम गीत प्रतियोगिता)

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प्रीत की प्यारी बनके,
सबकी दुलारी बन के,
मंह-मंह करती,
बसंत त्रृतु आ गई।
धानी चुनर पहने,
उससे मिलन करने,
सपने सुहाने ले के,
मधुमास को रिझा गई।
मंह-मंह करती,
बसंत त्रृतु आ गई।
कलियों ने राग छेड़,
भौरों के साथ खेले,
चूस के पराग रस,
देखो बलखा गई।
मंह-मंह करती,
बसंत ऋतु आ गई।
ताल तलैया देखो,
मन की गौरैया देखो,
फूल बन सरसो,
खेती में लहरा गई।
मंह-मंह करती,
बसंत ऋतु आ गई।
यौवन में निखार भर के,
फूलों से ऋंगार कर के,
देखते ही देखते,
धरती इठला गई।
मंह-मंह करती,
बसंत ऋतु आ गई।
मांग में सिंदूर भर के,
ऑंखों में नूर भर के,
चार दिन की चाँदनी,
धरती नहा गई।
मंह-मंह करती,
बसंत ऋत आ गई। -@अजय कुमार मिश्र “अजयश्री “

Last Updated on January 17, 2021 by ajayshree30

  • अजय कुमार मिश्र "अजय श्री"
  • गीत एंव नाट्य अधिकारी
  • परिवार कल्याण उ प्र लखनऊ
  • [email protected]
  • बागीश भवन,424/A-11,वैशाली एन्कलेव, सेक्टर-9,इन्दिरा नगर, लखनऊ (उ प्र)-226016
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