मकर संक्रांति आई हैं
मकर संक्रांति आई हैं मकर संक्रांति आई हैंएक नई क्रांति लाई हैंनिकलेंगे घरों से हमतोड़ बंधनों को सबजकड़ें हैं जिसमें सर्दी सेबर्फ़ शीत की गर्दी सेहटा तन से रजाई हैंमकर …
मकर संक्रांति आई हैं मकर संक्रांति आई हैंएक नई क्रांति लाई हैंनिकलेंगे घरों से हमतोड़ बंधनों को सबजकड़ें हैं जिसमें सर्दी सेबर्फ़ शीत की गर्दी सेहटा तन से रजाई हैंमकर …
*मेरा* *वतन* वतन है या तन है मेराप्राण न्योछावर इस पर कर जाऊं मैंसांस है या लहू है मेराभारत पर न्योछावर हो जाऊं मैं फूल है या है कोमल हृदयइस …
लोहड़ी आई ,लोहड़ी आईसौगात खुशियो का है लायी।।तिलकुटिया रेवड़ी मिलेजले ज्वाला की तेज अलाव।सर्दी का मौसम उल्लास की गर्मी उत्साह।।लोहड़ी आई ,लोहड़ी आई।।सौगात खुशियो का है लायी।।भांगड़ा गिद्दा डोल नगाड़ो …
घर डॉ. नानासाहेब जावळे घर प्रिय नहीं होता, केवल मनुष्य को ही होता है, पशु-पंछियों को भी अपना घर प्यारा हड़कंप मचने के बावजूद, दुनिया में होती है कामना, …
ग़ज़ल,,,,, फूलों की खुशबुओं से महकता जिगर रहा।। जब तक किसी हसीन का कांधे पर सर रहा।। देखा जो उसे दूर से अहसास हुआ यूं। जैसे फलक से चांद …
बैंक के रोकड़िए काकैसा नसीब हैंदिन भर दोनों हाथसने रहते रोकड़ मेंफिर भी रोकड़ कीपहुँच से दूर हैं मौलिक एवं स्वरचित जगदीश गोकलानी “जग ग्वालियरी” रचनाकार का नाम: जगदीश गोकलानी …
प्रेम का रंग चढ़ रहा है धीरे-धीरे बसंत आ रहा हैकोयल कूक ने वाली हैसंंग हम सब नर-नारी हैजोर जोर से बोलने कीसब कर लिए तैयारी हैतन का मन भंग …
सीढ़ी छत की दीवार से लगी सीढ़ीखड़ी दो पाँव परऊपर जाती नीचे आतीसीढ़ी चढ़नासीढ़ी उतरनाकरता निर्भरकहाँ खड़े हम। कुछ लोग सीढी के सहारेचढ़ जाते ऊपरवहीं बस जातेबहरे हो जातेअंधे बन …
हरियाणा गौरव गान (देशोsस्ति हरयाणाख्य: पृथ्व्यां स्वर्गसन्निभ:) कवि – जितेन्द्र सिंह वीर धरा म्हारा हरियाणा………….… कर्मठ निष्ठावान सारे पासे हम छाये…….…….खेल खेत हो जंग मैदान सभी जिलों की गौरव …
देश भक्ति काव्य लेखन प्रतियोगिता हेतु “हरियाणा गौरव गान” Read More »
बदलाव नए साल पर,कुछ तो नया पन लाओ।हो सके तो,कुछ आदतों में ही सुधार लाओ।कोई कब तक कहेगातुम सुधर जाओकभी तुम हीस्वयं को बदल कर,लोगों को अचंभित कर जाओ।चुन चुन …