अजय कुमार पाण्डेय की नई कविता, इंतजार-आखिर कब तक,

मोमबत्ती हाथ में लेकर चले सब एक दिन, इक दर्द के साथ हम सब चले थे एक दिन। दुखी अनगिनत चेहरे, दर्द पारावार सा इक नए प्रारंभ का सब स्वप्न पाले एक दिन। एक स्वर बस गूंज रहा था इस सकल ब्रम्हांड में यूँ लगा अब सृष्टि बदलेगी सकल ब्रह्माण्ड में। आंधियों में जोर था, …

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