सुखबीर दुहन की नई कविता- हालात-ए-किसान

हालात ए किसान यह जो तेरे घर में अन्न आया है। जरा सोचो किसने पसीना बहाया है। चाह मिटायी , चिन्ता पाई , चैन की नींद ना आई, तुझे दिया, खुद न खाया, बासी रोटी से भूख मिटाई। भोर उठा , मुंह न धोया ,मिट्टी से सनी काया , फटे कपड़े टूटी चप्पल ,आदर भी …

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