न्यू मीडिया में हिन्दी भाषा, साहित्य एवं शोध को समर्पित अव्यावसायिक अकादमिक अभिक्रम

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

सृजन ऑस्ट्रेलिया | SRIJAN AUSTRALIA

विक्टोरिया, ऑस्ट्रेलिया से प्रकाशित, विशेषज्ञों द्वारा समीक्षित, बहुविषयक अंतर्राष्ट्रीय ई-पत्रिका

A Multidisciplinary Peer Reviewed International E-Journal Published from, Victoria, Australia

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं
प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

श्रीमती पूनम चतुर्वेदी शुक्ला

सुप्रसिद्ध चित्रकार, समाजसेवी एवं
मुख्य संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

Month: January 2021

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“अंतराष्ट्रीय महिला दिवस प्रतियोगिता” शीर्षक”मां”

माँ:::::::::माँ ही शिक्षक महान जगत में अच्छा पाठ पढाती है।हिम्मत और होंसला दे कर,आगे सदा बढाती है।।1।।माँ दुनिया की महान विभूति,त्याग तपस्या की मूरत है।मनुज सृष्टि की रचयिता,माँ ईश्वर की …

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महिला दिवस काव्य लेखन प्रतियोगिता

सृजन आस्ट्रेलिया अंतरराष्ट्रीय ई पत्रिका(महिला दिवस काव्य प्रतियोगिता लेखन)(प्रतिभा नारी को भी अपनी दिखलाने दो) प्रतिभा नारी को भी अपनी दिखलाने दोबाधाओं को लांघ उसे बाहर आने दो (1)हर युग …

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ग़ज़ल,,,,, जीवन के संदर्भ,,,,,

ग़ज़ल,,,,, जीवन के संदर्भ बड़े गंभीर हुए।। हम कमान पर चढ़े हुए बिष तीर हुए।।   मृगतृष्णा केभ्रम में उलझे मृग मानव। विधवा की सूनी आंखों का नीर हुए।।   …

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प्रेम-काव्य प्रतियोगिता

तुमने ही हृदय बिछाया…. तुम धूप हो, तुम छाँव होपसरी हुई निस्तब्धता मेंजीवंत हुआ-सा ठाँव हो ।घिर-घिरकर जब आया तमतुमने ही दीया जलायाजब-जब हाथों से छूटे हाथ तुमने ही हृदय …

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तुमने ही हृदय बिछाया…

प्रेम-काव्य प्रतियोगिता हेतु रचना   तुमने ही हृदय बिछाया…. तुम धूप हो, तुम छाँव होपसरी हुई निस्तब्धता मेंजीवंत हुआ-सा ठाँव हो ।घिर-घिरकर जब आया तमतुमने ही दीया जलायाजब-जब हाथों से …

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उड़ान…

उड़ान… सुनो! भारी हो गए हैं तुम्हारे पंख झटक दो इन्हें एक बार उड़ान से पहले इनका हल्का होना बहुत आवश्यक है इन पर अटके हैं कुछ पूर्वाग्रह कुछ कुंठाएँ …

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महामारी का समय…

महामारी का समय …. यह महामारी का अपना समय हैसमय सबका होता हैसबका ‘नितांत ‘अपनाकभी पूर्ण पाश्विकता काकभी अदेखी मानवता काऔर कभी..दोनों ही में एक ही अनुपात में उलझायहाँ ‘नितांत …

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होली उसे कहो….

होली उसे कहो….! जब रंग रमे रस अंग-अंग भींगेतब होली उसे कहोजब हृदय हरित-हरित हो फिर तब होली उसे कहोजब फागुन वही बयार बहेतब होली उसे कहोजब प्रिय का फिर …

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