न्यू मीडिया में हिन्दी भाषा, साहित्य एवं शोध को समर्पित अव्यावसायिक अकादमिक अभिक्रम

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

सृजन ऑस्ट्रेलिया | SRIJAN AUSTRALIA

विक्टोरिया, ऑस्ट्रेलिया से प्रकाशित, विशेषज्ञों द्वारा समीक्षित, बहुविषयक अंतर्राष्ट्रीय ई-पत्रिका

A Multidisciplinary Peer Reviewed International E-Journal Published from, Victoria, Australia

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं
प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

श्रीमती पूनम चतुर्वेदी शुक्ला

सुप्रसिद्ध चित्रकार, समाजसेवी एवं
मुख्य संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

“अंतराष्ट्रीय महिला दिवस प्रतियोगिता” शीर्षक”मां”

Spread the love
image_pdfimage_print

माँ
:::::::::
माँ ही शिक्षक महान जगत में अच्छा पाठ पढाती है।
हिम्मत और होंसला दे कर,आगे सदा बढाती है।।1।।
माँ दुनिया की महान विभूति,त्याग तपस्या की मूरत है।
मनुज सृष्टि की रचयिता,माँ ईश्वर की सूरत है।।2।।
माँ में सकल गुण समाहित,सकल गुणों की खान है।
कोई नही है माँ से बढ कर,माँ तो सदा महान है।।3।।
धैर्य ममता सहनशीलता,दया करूणा का सागर है।
प्यार की गंगा माँ के दिल में,कोई न तोर बराबर है।।4।।
सारक तारक पालक पोषक,सहायक नायक माता है।
हमको लायक करने का बस,श्रेय तुम्ही को जाता है।।5।।
तेरे बिन सारा जग सूना,सूना जीवन सारा है।
मत जाना माँ हमें छोड कर,कोई नही हमारा है।।6।।
हर दम ध्यान सभी का रखती,कितनी भोली भाली माँ।
पास बैठ कर हमें जिमाती,तूं भोजन की थाली माँ।।7।।
जब कभी बीमार पडे हम,तूं मन ही मन रोती है।
गऊं की भांति तडपने लगती,नही रात भर सोती है।।8।।
हमे सुलाती थी सूखे में ,खुद गीले में सो जाती थी।
हमरी खुशियो में ही सारी,अपनी खुशियां पाती थी।।9।।
पास हुआ कोई जब तूं सुनती,तूं झूमने लगती माँ।
पूजा कर टीका लगवाती,और चूमने लगती माँ।।10।।
कोई नही है मां से बढ कर,माँ गुरू ईश्वर सारी है।
तेरी महिमा हद से ज्यादा,सबसे ज्यादा प्यारी है।।11।।
तूं पापा के बीच आ जाती,भला बूरा सुन लेती है।
खुद कहती पर ओरों को,कुछ नही कहने देती है।।12।।
निज बच्चों के लिए तूं दिल में,लाखों स्वप्न संजोती है।
रात-दिन बच्चो की रहती,खुद की चिंता ना होती है।।13।।
दादी मां ने खूब बखानी,तारीफ दादा जी ने की थी।
बहुत ही मस्त हमारी भाभी,पक्ष भुआ ने हरदम ली थी।।14।।
दिया न मौका शिकवा कभी,कितने काम तूं कर लेती है।
सबके दिल में तूं खशियों का,बाग खडा कर देती है।।15।।
हम जहां कहां भी होते,ज्यादा चिंता करती है।
लिये सभी के जीती है तूं,जान छिडकती मरती है।।16।।
मां चरणो में अडसठ तीरथ,तव चरणों में चारों धाम।
आशीर्वाद तुम्हारा चाहिये,हे!पूजनीय माँ प्रणाम।।17।।

*** जबरा राम कण्डारा ***
::::::::::::::::::::::::::::

Last Updated on January 19, 2021 by jabraramkandarasaheb

  • जबरा राम कंडारा
  • वरिष्ठ अध्यापक
  • राजस्थान शिक्षक संघ
  • [email protected]
  • बाई पास रोड, रानीवाड़ा ।जिला- जालोर(राजस्थान)पिन-343040
Facebook
Twitter
LinkedIn

More to explorer

image_20260921_102530

रचनात्मकता, संस्कार और रंगमंच का समन्वित अभिव्यक्ति के व्यक्तित्व डॉ ० उमेश कुमार   चौरसिया

Spread the love

Spread the love Print 🖨 PDF 📄 eBook 📱रचनात्मकता, संस्कार और रंगमंच का समन्वित अभिव्यक्ति के व्यक्तित्व डॉ ० उमेश कुमार   चौरसिया

Leave a Comment

error: Content is protected !!