“प्रेम-काव्य लेखन प्रतियोगिता”- जल उठे दीप
जल उठे दीप जल उठे दीप दोऊ ,आरती तो सजाने दे भावना का भोग , इस देवी को चढ़ाने दे | हँसी की तरंगिणी को ,कान घुल जाने दे मिश्री …
जल उठे दीप जल उठे दीप दोऊ ,आरती तो सजाने दे भावना का भोग , इस देवी को चढ़ाने दे | हँसी की तरंगिणी को ,कान घुल जाने दे मिश्री …
जाग वीर जाग वीर वीरता भर ,निंद्रा का तू त्याग कर दे भारती के आन पर तू, प्राण का बलिदान कर दे प्रस्थान कर सीमाओं पर, अरि को तू …
“देशभक्ति-काव्य लेखन प्रतियोगिता” हेतु कविता – जाग वीर Read More »
प्रेम की परिभाषा प्रेम की पवित्रता परखना हो तो भगवान की सूरत से परखों प्रेम छोडने के लिए नहीं …
प्रेम-काव्य लेखन प्रतियोगिता – प्रेम की परिभाषा Read More »
1****** “मातृ वन्दना” ***** हे जन्मभूमि, हे कर्मभूमि, हे धर्मभूमि है तुझे प्रणाम! ऐ रंगभूमि, ऐ युद्वभूमि, ऐ तपोभूमि है तुझे प्रणाम!! सम्प्रदायों की सरिताएँ हैं, बहु धर्मों का संगम …
गुलाम 3 – रेत रेत खेलती लङकियों ने फैसला कियाअब नहीं खेलेंगे रेत रेतऔर कुछ हाथों ने अचानक बन्दूक थाम लियानेस्तोनाबूत कर दिए गयेकितनी गुङियों के घरतोङ दी गई कलमेंफाङ डाले …
रचनाकार का नाम: अशोक धीवर पदनाम: जलक्षत्री संगठन: राष्ट्रवादी लेखक संघ सदस्य ईमेल पता: [email protected] पूरा डाक पता: ग्राम तुलसी (तिल्दा-नेवरा) जिला-रायपुर (छत्तीसगढ़) पिन 493114
यादें [“हरिश्चंदा” (प्रेम की अनन्य गाथा) प्रेम काव्य कविता का नायक हरि अपनी चंदा का स्मरण करते हुए लेखक “हिंदी जुड़वाँ”] मैं पलट रहा हूं पन्ना पन्ना, यादों की परछाई …
मै हू एक नारी सबला होकर भी क्यों पुकारते है अबला हर वक्त हर कदम ये सवाल रहता साये की तरह पीछे सोच सोच कर हार जाती हू जवाब ढूड …
राष्ट्र की ये दुखियारी धरती स्वर्ग बना दे भारत माँ,अपनी ममता के अमृत से इसे सजा दे भारत माँ। देश के कपटी भ्रष्टाचारी तुझसे धोखा करते हैं,तेरे ही आँचल में …
आज हमें भारत को स्वर्ग बनाना है,अपने श्रम की बूंदों से सजाना है। चलें राष्ट्र के गौरव को बढ़ाने हम,आओ तोड़ दें सभी स्थूलता का ये भ्रम,नहीं रहेगा भारत अब …