न्यू मीडिया में हिन्दी भाषा, साहित्य एवं शोध को समर्पित अव्यावसायिक अकादमिक अभिक्रम

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

सृजन ऑस्ट्रेलिया | SRIJAN AUSTRALIA

विक्टोरिया, ऑस्ट्रेलिया से प्रकाशित, विशेषज्ञों द्वारा समीक्षित, बहुविषयक अंतर्राष्ट्रीय ई-पत्रिका

A Multidisciplinary Peer Reviewed International E-Journal Published from, Victoria, Australia

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं
प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

श्रीमती पूनम चतुर्वेदी शुक्ला

सुप्रसिद्ध चित्रकार, समाजसेवी एवं
मुख्य संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

वह बेचती थी गुटका भग —3

Spread the love
image_pdfimage_print

सालों से चलता सिलसिला मेरे
भी भावो का आकर्षण अधेड़ उम्र महिला की ओर बढ़ चला जो बेचती थी गुटका।।
मैने भी एक दिन उस अधेड़ उम्र
औरत जो मेरे प्रतिदिन की दिन
चर्या की आवश्यक थी हिस्सा ।।
अनिवार्यता प्रति दिन का
सत्य सत्यार्थ थी किस्सा ।।
किया सवाल माई तू जाड़ा गर्मी
बरसात पाला चाहे कौनो हो
हाल हालात गुमटी के दुकान तोहार
मंदिर मस्जिद गुरुद्वार।।
काहे तोहरे लईका बच्चे नाही का
तोहार पति परमेश्वर करतेन
काहे ये उम्र में जान देत हऊ माई।।
उस अधेड़ उम्र औरत की आंख
डबडबा गई आंखों में आंसुओ का
तूफान जो नही ले रहा था थमने
का नाम ।।
हमे अपनी गलती का हुआ एहसास
लगा मेरे ही कारण इस अधेड़ उम्र
औरत को ना जाने किस पीड़ा का
दर्द अनुभव आघात।।
मैन झट माफी मांगी बोला माई
गलती हमार ना करके चाही कौनो
अइसन सवाल ।।
पथराई मुरझाई नज़रो मायूसी
अंधकार के निराश मन से
उस अधेड़ उम्र की औरत का
जबाब।।
बोली बाबू दोष कौन तोहार
जब भगवाने दिहले हमार जिनगी
बिगाड़ पूछते बाढ़ त ल बाबू तोहू
जान ।।
हम गाय घाट गांव के बाछी बेटी
गोपालापुर में माई बाबू बड़े खुशी
से करेन बियाह ।।
हमरे दुई बेटा एक बेटी पति
परमेश्वर भरा पूरा परिवार।।

नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर गोरखपुर उत्तर प्रदेश

Last Updated on February 18, 2021 by nandlalmanitripathi

  • नंन्दलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
  • प्राचार्य
  • भारतीय जीवन बीमा निगम
  • [email protected]
  • C-159 दिव्य नगर कॉलोनी पोस्ट-खोराबार जनपद-गोरखपुर -273010 उत्तर प्रदेश भारत
Facebook
Twitter
LinkedIn

More to explorer

image_20260921_102530

रचनात्मकता, संस्कार और रंगमंच का समन्वित अभिव्यक्ति के व्यक्तित्व डॉ ० उमेश कुमार   चौरसिया

Spread the love

Spread the love Print 🖨 PDF 📄 eBook 📱रचनात्मकता, संस्कार और रंगमंच का समन्वित अभिव्यक्ति के व्यक्तित्व डॉ ० उमेश कुमार   चौरसिया

Leave a Comment

error: Content is protected !!