वह बेचती थी गुटका भग —3
सालों से चलता सिलसिला मेरेभी भावो का आकर्षण अधेड़ उम्र महिला की ओर बढ़ चला जो बेचती थी गुटका।।मैने भी एक दिन उस अधेड़ उम्रऔरत जो मेरे प्रतिदिन की दिनचर्या […]
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सालों से चलता सिलसिला मेरेभी भावो का आकर्षण अधेड़ उम्र महिला की ओर बढ़ चला जो बेचती थी गुटका।।मैने भी एक दिन उस अधेड़ उम्रऔरत जो मेरे प्रतिदिन की दिनचर्या […]
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आते जाते गुटखा शौख केनाते अधेड़ उम्र की औरतकी दुकान से भाव भावनाका हो गया लगाव।।अधेड़ उम्र उस औरत ने भीमुझे अपनी दुकान का नियमितग्राहक लिया मान।।जब कभी हो जाता
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प्रातः नौ बजे दफ़्तर जाने कोचाहे जो भी हो मौसम का मिजाज।। घर से निकलता दिन शुभ मंगल होकोई ना हो विवाद अशुभ ईश्वर सेआराधन करता।। कार्यालय के मुख्य द्वार