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डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

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विक्टोरिया, ऑस्ट्रेलिया से प्रकाशित, विशेषज्ञों द्वारा समीक्षित, बहुविषयक अंतर्राष्ट्रीय ई-पत्रिका

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डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं
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श्रीमती पूनम चतुर्वेदी शुक्ला

सुप्रसिद्ध चित्रकार, समाजसेवी एवं
मुख्य संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

फूल के जज्बात

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गांव शहर नगर की गलियों की
कली सुबह सुर्ख सूरज की लाली के
साथ खिली ।।
चमन में बहार ही बहार मकरंद
करते गुंजन गान नहीं मालुम चाहत जिंदगी जाने कब छोड़ देगी साथ।।
रह जाएगा चमन में गम का साथ।।
फिर किसी कली के खिलने का
इंतज़ार गली गली फिरता भौरा
बेईमान कली के खिलने का करता
इंतज़ार।।
गुल गुलशन गुलज़ार चमन बहार में कली की मुस्कराहट फूल की चाह आवारा भौरे की राह।।
भौरे की जिंदगी प्यार का
दस्तूर जिंदगी भर अपने मुकम्मल
प्यार की तलाश में घूमता।।
इधर उधर पूरी जिंदगी हो जाती
बेकार खाक भौरे को हर सुबह खिले फूलों का लम्हा दो लम्हा साथ ही जिंदगी का एहसास।।
पल दो पल के एहसास के लिये भौरे बदनाम आवारा दुनियां ने दिया नाम।।
भौरे की किस्मत
उसकी नियति जिंदगी प्यार
जज्बात लम्हा दो लम्हा फूल
का साथ जिंदगी भर कली के
खिलने का इंतज़ार।।

Last Updated on February 20, 2021 by nandlalmanitripathi

  • नंन्दलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
  • प्राचार्य
  • भारतीय जीवन बीमा निगम
  • [email protected]
  • C-159 दिव्य नगर कॉलोनी पोस्ट-खोराबार जनपद-गोरखपुर -273010 उत्तर प्रदेश भारत
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