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डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

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डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं
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श्याम ‘राज’ की कविता – ‘मिट्टी का दीया’

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दीप जलाओ खुशियों के
मिटा दो अंधियारे दिलों के
देखो ! आ गई है दिवाली
फिर खुशियों की बारात ले के
रंग रोगन देखो सब पुराने हुए
चलो फिर से नया करते हैं
खुद भी हंसते , सबको हंसाते हैं
ले आना तुम भी इस दिवाली को
मिट्टी के दीये , तेल , रूई की बाती को
छोड़ लडिया थडिया लाल पीली गुलाबी को
अब तक पैसें वालों से बहुत खरीदें
चलो ! इस बार खरीदें अम्मा से
जो बैठी है सुबह से चौराहे पर
ले मिट्टी के दीये
मोल-भाव यहां तुम मत करना
बस दो रूपये का है एक दीया |

Last Updated on January 4, 2021 by srijanaustralia

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