अतुल्य भारत
भारत माँ की हम सन्तान,
मिला हमें है यह वरदान |
देव भी जन्म लेने को आतुर,
ऐसी है भारतभूमि की शान |
राष्ट्र प्रहरी हैं इसका मान,
विश्व भी गाए जिसका गुणगान |
नव्य समन्वय को व्याकुल,
प्राचीन विरासत की है खान |
विविधता में एकता का भान
कराती, भारतीय संस्कृति महान |
धर्म व जाति भिन्न है बिल्कुल
परन्तु हृदय में मातृभूमि का सम्मान|
– डॉ. उपासना पाण्डेय, प्रयागराज
Last Updated on January 3, 2021 by pandeyupasana009
- मंच
- डाॅ. उपासना पाण्डेय
- साहित्यिक
- [email protected]
- 151 बाघम्बरी हाउसिंग स्कीम, भरद्वाजपुरम् 211006,प्रय







