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देशभक्ति काव्य लेखन प्रतियोगिता हेतु- अतुल्य भारत

अतुल्य भारत

भारत माँ की हम सन्तान, 

मिला हमें है यह वरदान |

देव भी जन्म लेने को आतुर, 

ऐसी है भारतभूमि की शान |

राष्ट्र प्रहरी हैं इसका मान, 

विश्व भी गाए जिसका गुणगान |

नव्य समन्वय को व्याकुल, 

प्राचीन विरासत की है खान |

विविधता में एकता का भान

कराती, भारतीय संस्कृति महान |

धर्म व जाति भिन्न है बिल्कुल

परन्तु हृदय में मातृभूमि का सम्मान|

– डॉ. उपासना पाण्डेय, प्रयागराज