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डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

सृजन ऑस्ट्रेलिया | SRIJAN AUSTRALIA

विक्टोरिया, ऑस्ट्रेलिया से प्रकाशित, विशेषज्ञों द्वारा समीक्षित, बहुविषयक अंतर्राष्ट्रीय ई-पत्रिका

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डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं
प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

श्रीमती पूनम चतुर्वेदी शुक्ला

सुप्रसिद्ध चित्रकार, समाजसेवी एवं
मुख्य संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

सोचता हुँ

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सोचता हुँ,
सभी की भलाई
सब हो खुशहाल
ना हो कोई बदहाल।

सब करे प्रगति
सब करे उन्नति
सबको मिले अधिकार
फले फुले सबका परिवार।

ना किसी से ईर्ष्या है ना ही प्रतियोगिता
ना किसी से अपेक्षा है ना किसी की उपेक्षा
मन मे ना किसी के लिए द्वेष, ना ही कपट
तो क्या इस सोच में ही है कुछ खोट।

क्या सबकी भलाई सोचने में है कुछ त्रुटि
क्या इस पर भारी है मानव की वृत्ति
क्या जानवरों से भिन्न हो पाया है मनुष्य की प्रवृत्ति

भैस जैसा बैर
बिच्छू जैसा डंक
हाथी जैसा अंह
गिरगिट जैसा रंग बदलना
केकड़े जैसा टांग खींचना
कुत्ते जैसा पैर चाटना
लोमड़ी जैसी चालाकी

सोचता हूँ क्या ये दुनिया ऐसी ही रहेगा
क्या मानव इस प्रवृत्ति से उबर पायेगा
क्या वो स्वार्थ और वर्चस्व की लड़ाई से ऊपर उठ पायेगा
क्या कभी एकता और सौहार्द का सूरज चमकेगा
क्या कभी वसुधैव कुटुंबकम का स्वप्न पूर्ण हो पायेगा?

Last Updated on January 23, 2021 by sheetal.phy14

  • शीतल साहू
  • व्याख्याता
  • विवेकानन्द विद्यापीठ रायपुर
  • [email protected]
  • विवेकानंद विद्यापीठ कोटा रायपुर छत्तीसगढ़ 492010
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