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डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

सृजन ऑस्ट्रेलिया | SRIJAN AUSTRALIA

विक्टोरिया, ऑस्ट्रेलिया से प्रकाशित, विशेषज्ञों द्वारा समीक्षित, बहुविषयक अंतर्राष्ट्रीय ई-पत्रिका

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डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं
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श्रीमती पूनम चतुर्वेदी शुक्ला

सुप्रसिद्ध चित्रकार, समाजसेवी एवं
मुख्य संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

चादर

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वक्त की चादर ओढ़े बैठा
खुदको ढूंढता रहता हूँ मैं।
दुनियां बहुत बड़ी है लेकिन
मैं उस चादर में ही सिमटा रहता।

डर से भाग रहा हूँ खुदके
और मैं खुद में ही सिमटा रहता।
चाहत मेरी भी थी खुद से
मैं तुझसे इस दुनियां को कुछ कहता।

बिखरे मोती सा मैं सागर का था पहरा
तारों की दुनियां मैं
चादर ओढ़े रहता।

फिसल गया था जो वक़्त नहीं था
मेरे रिश्तों का था चेहरा
मैं था फिर भी चादर ओढ़े
खुद के भीतर कुछ सिमटा रहता।

चाहता था रोक लूं उनको लेकिन
बदलते वक्त पर था मेरा चेहरा।
बदल रहा थे वक़्त के बादल
और मैं सिमटा रहा ओढ़े
मुझपर था चादर का पहरा।

Last Updated on January 10, 2021 by opsahani87

  • डॉ ओमप्रकाश साहनी
  • अस्सिटेंट प्रोफेसर
  • केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय
  • [email protected]
  • Rajeev gandhi campus , sringeri, karnataka,
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