देश भक्ति-काव्य लेखन प्रतियोगिता हेतु कविता
शहीदों के खून की खुशबू मिटने नही देगे, हम अपने परचम को कभी झुकने नही देगे | हमे लुटने के दर्द का अहसास हो चुका है, बमुश्किल सम्हले है आबरू […]
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शहीदों के खून की खुशबू मिटने नही देगे, हम अपने परचम को कभी झुकने नही देगे | हमे लुटने के दर्द का अहसास हो चुका है, बमुश्किल सम्हले है आबरू […]
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1. भारत वंदना आतंकित पीड़ित है आज गौरवमयी भारत माँ अर्पित कर दे तेरी सेवा में तन-मन-धन धानी के अंचल में तरुणाई सोती है सावन के झूलों को
गणतन्त्र दिवस छब्बीस जनवरी उन्नीस सौ पचास कोमेरा भारत घोषित हुआ गणतन्त्रसंविधान लागू हो गया और भारत बन गया पूर्ण गणतन्त्र । पर यह मुकाम हासिल करने में,कितनों ने जान
शहीद देश की आन पर कुर्बान हो गए सरहदों पर जो अड़े मेरी जान हो गए हूँकारते रहे वो सिहं सी दहाड़ से मात दे वो मौत को हिंदुस्तान होगए
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मिलन प्रिय जब से सुनी है मेरे कानों में तेरे कदमों की आहट।दिल धड़कने लगा है, बैचेनी बढ़ी, बढ़ गयी घबराहट। थम गई है सांसे तुमसे तुम्हारा प्रेम छुपाना चाहती
प्रेम काव्य लेखन प्रतियोगिता हेतु “मिलन” Read More »
देश भक्ति काव्य लेखन प्रतियोगिता के लिए प्रेषित कविताएं 1.कविता का शीर्षक :- लोकततंत्र लोकतंत्र की राजनीति में, ‘लोक’ खो गया ‘तंत्र’ बाकी हैं।
परिचय: नाम – डॉ . पद्मावती जन्म स्थान -दिल्ली, मातृ भाषा- तेलुगु शैक्षिक योग्यता – एम ए ,एम फ़िल , पी.एच डी , स्लेट. (हिंदी) अध्यापन कार्य
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वक्त की चादर ओढ़े बैठा खुदको ढूंढता रहता हूँ मैं।दुनियां बहुत बड़ी है लेकिनमैं उस चादर में ही सिमटा रहता। डर से भाग रहा हूँ खुदकेऔर मैं खुद में ही
वक़्त रचनाकार का नाम: सत्यमित्र पदनाम: डॉ संगठन: सृजन ईमेल पता: [email protected] पूरा डाक पता: सितारगंज ऊधम सिंह नगर उत्तराखंड 262405