न्यू मीडिया में हिन्दी भाषा, साहित्य एवं शोध को समर्पित अव्यावसायिक अकादमिक अभिक्रम

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

सृजन ऑस्ट्रेलिया | SRIJAN AUSTRALIA

विक्टोरिया, ऑस्ट्रेलिया से प्रकाशित, विशेषज्ञों द्वारा समीक्षित, बहुविषयक अंतर्राष्ट्रीय ई-पत्रिका

A Multidisciplinary Peer Reviewed International E-Journal Published from, Victoria, Australia

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं
प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

श्रीमती पूनम चतुर्वेदी शुक्ला

सुप्रसिद्ध चित्रकार, समाजसेवी एवं
मुख्य संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

गणतन्त्र दिवस

Spread the love
image_pdfimage_print

गणतन्त्र दिवस

छब्बीस जनवरी उन्नीस सौ पचास को
मेरा भारत घोषित हुआ गणतन्त्र
संविधान लागू हो गया और
भारत बन गया पूर्ण गणतन्त्र ।

पर यह मुकाम हासिल करने में,
कितनों ने जान गँवाई थी।
खुद कितनी रातें जेल में रहकर ,
हमको आजादी दिलवाई थी ।

गणतन्त्र भारत का तिरंगा
कुछ पूछ रहा तुझ से ओ बन्दे ।
उन वीरों को भी याद करो
जो झूल गए फाँसी के फन्दे।

गाँधी, सुभाष , तिलक, और नेहरू
चन्द्रशेखर, पटेल , अम्बेड़कर
भारत को सम्मान दिलाया ,
खुद अत्याचारों को झेलकर।

स्वतन्त्र हो गया, गणतन्त्र हो गया
भारत होगया विश्व में सम्मानित।
पर भारत के सम्मान के खातिर
हमें त्यागने होगें अपने निजी हित ।

देशहित हो सबसे ऊपर ,
आओ शपथ लें मिल कर आज ।
फिर से बन जाए सोने की चिड़िया
विश्व करेगा भारत पर नाज ।

क्या हम आज़ादी पा लेते,
गर यही सोचते वीर हमारे।
खुली हवा में साँस ना मिलती
छँटते नहीं बादल कारे।

शत् शत् नमन है उन वीरों को,
प्राण दिए जिन्होंने अपने
बाजी लगा दी अपनी जान की,
पूरे किए हमारे सपने।

आज़ादी तो मिल गई हमको,
पर क्या सचमुच हम आज़ाद हो गए?
क्यूँ प्राण गँवाए उन वीरों नें
क्या वो सपने साकार हो गए?

अंधविश्वास और कुटिल कुरीतियाँ,
अब भी करती हम पर राज
कैसा होगा भविष्य हमारा
जब नहीं सुरक्षित हमारा आज।

भ्रूणहत्या, बलात्कार, चोरी,
दान-दहेज की बेड़ियाँ,
ऐसे दानवों के आगे हम
अब भी रगड़ते एड़ियाँ।

सादा जीवन उच्च विचार,
ये नारा हम लगाते हैं।
जब सोच हमारी छोटी है,
तो कैसे यह कह पाते हैं?

ये ज्वलंत समस्याएँ हैं हमारी,
जिनके हम अब भी गुलाम हैं।
सोच नहीं बदलेगी जब तक
हम आज़ाद होकर भी गुलाम हैं।

सोच नहीं बदलेगी जब तक

हम आज़ाद होकर भी गुलाम हैं।

(स्वरचित व मौलिक ) 

…समिधा नवीन वर्मा 

Last Updated on January 17, 2021 by samidhanaveenvarma

  • Samidha
  • Varma
  • Varma & Associates
  • [email protected]
  • Lovely Lodge, Gill Colony, Saharanpur, Uttar Pradesh, India
Facebook
Twitter
LinkedIn

More to explorer

image_20260921_102530

रचनात्मकता, संस्कार और रंगमंच का समन्वित अभिव्यक्ति के व्यक्तित्व डॉ ० उमेश कुमार   चौरसिया

Spread the love

Spread the love Print 🖨 PDF 📄 eBook 📱रचनात्मकता, संस्कार और रंगमंच का समन्वित अभिव्यक्ति के व्यक्तित्व डॉ ० उमेश कुमार   चौरसिया

Leave a Comment

error: Content is protected !!