न्यू मीडिया में हिन्दी भाषा, साहित्य एवं शोध को समर्पित अव्यावसायिक अकादमिक अभिक्रम

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

सृजन ऑस्ट्रेलिया | SRIJAN AUSTRALIA

विक्टोरिया, ऑस्ट्रेलिया से प्रकाशित, विशेषज्ञों द्वारा समीक्षित, बहुविषयक अंतर्राष्ट्रीय ई-पत्रिका

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डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं
प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

श्रीमती पूनम चतुर्वेदी शुक्ला

सुप्रसिद्ध चित्रकार, समाजसेवी एवं
मुख्य संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

देशभक्ति काव्य लेखन प्रतियोगिता हेतु काव्य:तुम कहाँ समझोगे

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1.तुम कहाँ समझोगे

    

 

तुम हँस लोगे

रो लोगे

उसे अपनाकर

नवीव जीवन कल्प बो लोगे

अर्धांग बन

बाटोगे सुॖ:ख-दु:ख

नवीन भूमिकाएं

नवीन ज़िम्मेदारियां

होंगे नित

नयी संभावनाओं को उन्मुख

नवीन सुखद क्षणों की 

स्मृतियां सहेजोगे

पर बांट न सकोगे

उसका दुःख

जो उसका अपना है

नहीं चुका पाओगे

उसके बलिदानों की कीमत

जो औरत होने पर

वह देती आई है

नहीं झांक पाओगे 

वह कोना

जिसमें वह रहती है

अपना मैं लिये

नहीं पढ़ पाओगे

उसकी चमकती आँखों के

पीछे की हर बात

नहीं समझ पाओगे

उसके थरथराते 

होठों के

पीछे की व्यथा

न कुछ कह सकने

की तड़प को

तुम कहाँ समझोगे

Last Updated on January 4, 2021 by sarikathakur406

  • BPSP BB.Ed. clg daudnagar aurangabad bihar
  • सारिका ठाकुर
  • सहायक प्रोफेसर,बी.पी.एस.पी.बी.एड. कॉलेज दाउदनगर,औरंगाबाद,बिहार 824113
  • [email protected]
  • आकांक्षा धर्म कांटा,पटेल नगर,पटना रोड,पोस्ट-भकरुआ मोर,दाउदनगर,औरंगाबाद,बिहार,824113
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