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देशभक्ति काव्य लेखन प्रतियोगिता हेतु काव्य:तुम कहाँ समझोगे

1.तुम कहाँ समझोगे

    

 

तुम हँस लोगे

रो लोगे

उसे अपनाकर

नवीव जीवन कल्प बो लोगे

अर्धांग बन

बाटोगे सुॖ:ख-दु:ख

नवीन भूमिकाएं

नवीन ज़िम्मेदारियां

होंगे नित

नयी संभावनाओं को उन्मुख

नवीन सुखद क्षणों की 

स्मृतियां सहेजोगे

पर बांट न सकोगे

उसका दुःख

जो उसका अपना है

नहीं चुका पाओगे

उसके बलिदानों की कीमत

जो औरत होने पर

वह देती आई है

नहीं झांक पाओगे 

वह कोना

जिसमें वह रहती है

अपना मैं लिये

नहीं पढ़ पाओगे

उसकी चमकती आँखों के

पीछे की हर बात

नहीं समझ पाओगे

उसके थरथराते 

होठों के

पीछे की व्यथा

न कुछ कह सकने

की तड़प को

तुम कहाँ समझोगे