न्यू मीडिया में हिन्दी भाषा, साहित्य एवं शोध को समर्पित अव्यावसायिक अकादमिक अभिक्रम

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

सृजन ऑस्ट्रेलिया | SRIJAN AUSTRALIA

विक्टोरिया, ऑस्ट्रेलिया से प्रकाशित, विशेषज्ञों द्वारा समीक्षित, बहुविषयक अंतर्राष्ट्रीय ई-पत्रिका

A Multidisciplinary Peer Reviewed International E-Journal Published from, Victoria, Australia

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं
प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

श्रीमती पूनम चतुर्वेदी शुक्ला

सुप्रसिद्ध चित्रकार, समाजसेवी एवं
मुख्य संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

सपना नेगी की कविता – ‘धन्यवाद कोरोना!’

Spread the love
image_pdfimage_print

कोरोना ! तुमने हमें बहुत कुछ स्मरण करवा दिया
पश्चिमीकरण की चकाचौंध में फंसकर
अपनी पुरातन संस्कृति भूल गए थे हम

तुमने ही हमारा परिचय पुन: संस्कृति से करवाया।

देशी भोजन को छोड़ बर्गर, पिज्जा,
लेग पीस के पीछे भागने वालों को

पुन: शुद्ध देशी भोजन से अवगत कराया।

होटल, रेस्टोरेंट से नयी-नयी डिश मंगवाने की

आदी हो चुकी महिलाओं को

तुमने ही नए-नए डिश बनाना सीखा दिया।

जिव्हा के स्वाद में डूबे नये-नये मसालों का इस्तेमान करने वालों को
जिन्होंने कभी ध्यान ही नहीं दिया,
नए के चक्कर में फंसकर पुरानों को भुला दिया
उनको तुमने उन्हीं पुराने मसालों के करीब ला दिया।

नमस्ते वाली पुरातन रीति छोड़
हाथ मिलाना, गले लगना हमारा फैशन बन गया था

तुमने ही नमस्ते वाली संस्कृति को पुन: अपनाना सिखा दिया।

हमारी संस्कृति ने ही तो सिखलाया था
जब भी बाहर से आओ
हाथ, पैरों को साफ़ कर अच्छी तरह अंदर आओ
फिर कैसे हम अपनी संस्कृति की बातें भूलते चले गए
कोरोना ने आकर हमें एहसास कराया
संस्कृति को भूलो मत
जो पहले करते थे, वही दुबारा करो ना।

तुमने आकर सबको एकता का पाठ पढ़ा दिया

दिखला दिया बिमारी जात-पात

रंग-रूप, ऊँच-नीच, धर्म को देखकर नहीं आती।
तुमने शहरों में रहने वालों को उनकी औकात दिखा दी
जो ख़ुद को माडर्न और गाँव के लोंगों को गंवार समझते थे
तुमने ही आज उनको गाँवों का रास्ता दिखा दिया
उनकी आँखों पर पड़ी अहंकार की पट्टी को हटा दिया।

कल तक जो स्वार्थी बनकर केवल पैसों के पीछे भागते थे
तुमने ही उनको रिश्तों का असली मोल सिखा दिया
अपनों के साथ बैठ चंद लम्हे बिताने का
सुनहरा मौका दिया।

जिम के पीछे भागने वालों को

तुमने ही पुन: योग का महत्त्व समझाया।

दिल्ली तक को प्रदूषण रहित कर
न केवल हमें साँसों का मोल बताया
पर्यावरण के संदर्भ में कई उदाहरण
हमारे लिए छोड़ गए।

जिन डॉक्टर, पुलिस वालों के फर्ज़ को कभी समझा ही नहीं हमने
कोरोना संकट में उन्हीं ने अपने परिवार को भुला

हम सबका ध्यान रखा
परिवार से पहले अपना फर्ज़ निभाया

तुमने आकर ही, लोगों को उनका मान, सम्मान सिखा दिया।

जिसके बारे में हमने कभी सोचा नहीं

ऐसे नए-नए शब्द देखो तुमने आकर जोड़ दिए
कोरोनटाइन, आइसोलेशन, जनता कर्फ्यू, लॉक डाउन
तुम्हारे ही कारण इन शब्दों का मोल हम समझ पाएँ।

हमें हमारी संस्कृति से पुन: जोड़ दिया।

तुम्हारा धन्यवाद, कोरोना!

(शोधार्थी), हिंदी-विभाग, पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़-160014

मोबाइल नं: 9354258143, ईमेल पता : [email protected]

Last Updated on October 20, 2020 by srijanaustralia

    Facebook
    Twitter
    LinkedIn

    More to explorer

    प्रतीकात्मक छवि

    साहित्यिक पत्रिकाओं को प्रतिद्वन्द्विता की दौड़ से बाहर निकालकर एक परिवार बनाने का उपक्रम है यह सम्मेलन-डॉ विकास दवे

    Spread the love

    Spread the love Print 🖨 PDF 📄 eBook 📱 साहित्यिक पत्रिकाओं को प्रतिद्वन्द्विता की दौड़ से बाहर निकालकर एक परिवार बनाने का उपक्रम

    प्रतीकात्मक छवि

    मध्य प्रदेश संस्कृति विभाग के साहित्य अकादमी की ऐतिहासिक पहल की समीक्षा

    Spread the love

    Spread the love Print 🖨 PDF 📄 eBook 📱मध्य प्रदेश संस्कृति विभाग के साहित्य अकादमी की ऐतिहासिक पहल की समीक्षा साहित्यिक पत्रिकाओं

    प्रतीकात्मक छवि

    जरूरी और उपयोगी है संपादकीय कर्म की चुनौतियों पर प्रशिक्षण और संपादकों के बीच आपसी विमर्श – डॉ. शैलेश शुक्ला

    Spread the love

    Spread the love Print 🖨 PDF 📄 eBook 📱 जरूरी और उपयोगी है संपादकीय कर्म की चुनौतियों पर प्रशिक्षण और संपादकों के

    Leave a Comment

    error: Content is protected !!