न्यू मीडिया में हिन्दी भाषा, साहित्य एवं शोध को समर्पित अव्यावसायिक अकादमिक अभिक्रम

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

सृजन ऑस्ट्रेलिया | SRIJAN AUSTRALIA

विक्टोरिया, ऑस्ट्रेलिया से प्रकाशित, विशेषज्ञों द्वारा समीक्षित, बहुविषयक अंतर्राष्ट्रीय ई-पत्रिका

A Multidisciplinary Peer Reviewed International E-Journal Published from, Victoria, Australia

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं
प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

श्रीमती पूनम चतुर्वेदी शुक्ला

सुप्रसिद्ध चित्रकार, समाजसेवी एवं
मुख्य संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

माँ

Spread the love
image_pdfimage_print

 

माँ

(माँ, स्वयं विधाता का प्रतिरूप है और इस संसार में  नारी शक्ति – माँ पर दुनियाभर में अनंत काव्य सृजन किए  गए  हैं, किए जा रहे हैं। उन्हीं में से मेरी कविता के रूप में सभी माताओं को यह कविता समर्पित है)

जब दुनिया में आई सहमी डरी थी घबराई
मां का स्पर्श पाकर अपार सुकून था पाया
मां ने मुझे सीने लगाकर पीड़ा को था भुलाया
दुग्धामृत पीकर और पिलाकर दोनों हुए थे कृतार्थ
मां के आंचल में विराजते स्वयं विधाता परमार्थ
मां जब भी मुझको दूध पिलाती
पल्लू से ढक कर दुनिया की बुरी नजर से बचाती
सिर पर प्यार भरा हाथ फेरती, एक टक मैं उन्हें निहारती रहती
जैसे-जैसे मैं बड़ी हुई, मां की चिंता को बढ़ाया
घर परिवार की मर्यादा सत्य धैर्य का पाठ पढ़ाया
मेरा जीवन कर्ज है तेरा, जो कभी चुका ना पाऊं
जब भी पुनर्जन्म पाऊं, तेरी कोख तेरा आंचल पाऊं
जब भी तुम्हें देखती हूं मंत्रमुग्ध हो जाती हूं
तुम इतनी अच्छी और तुम इतनी सच्ची हो मां
तुम्हें लिखना संभव नहीं, मेरे शब्दों में इतनी जान नहीं मां
मेरी मां क्या है, मैं ही जानूं मेरी इच्छा है
यही मेरी मां की परछाई बनूं
मां मेरे पास रहे, ना रहे मैं कहीं भी रहूं
आपका आशीर्वाद रूप सदा मेरे साथ रहे
इतना मान सम्मान दो अपनी माता को
औरत बनाते वक्त अफसोस ना हो विधाता को
धन्य हो, हे ईश्वर धरती पर अपना एक रूप मां का बनाया
मैंने तो समूचा संसार अपनी मां में पाया

कवयित्री
पिंकी “हरि” भार्गव
माता-पिता- श्रीमती सुमित्रा देवी श्री मनीराम भार्गव
भार्गव हिंदी भवन
कराला, उत्तर पश्चिम, दिल्ली

Last Updated on April 25, 2021 by bhargavahari22

  • पिंकी "हरि" भार्गव
  • स्वतंत्र कवयित्री
  • भार्गव हिंदी भवन, कराला, उत्तर पश्चिम, दिल्ली
  • [email protected]
  • भार्गव हिंदी, भवन कराला, उत्तर पश्चिम, दिल्ली
Facebook
Twitter
LinkedIn

More to explorer

प्रतीकात्मक छवि

साहित्यिक पत्रिकाओं को प्रतिद्वन्द्विता की दौड़ से बाहर निकालकर एक परिवार बनाने का उपक्रम है यह सम्मेलन-डॉ विकास दवे

Spread the love

Spread the love Print 🖨 PDF 📄 eBook 📱 साहित्यिक पत्रिकाओं को प्रतिद्वन्द्विता की दौड़ से बाहर निकालकर एक परिवार बनाने का उपक्रम

प्रतीकात्मक छवि

मध्य प्रदेश संस्कृति विभाग के साहित्य अकादमी की ऐतिहासिक पहल की समीक्षा

Spread the love

Spread the love Print 🖨 PDF 📄 eBook 📱मध्य प्रदेश संस्कृति विभाग के साहित्य अकादमी की ऐतिहासिक पहल की समीक्षा साहित्यिक पत्रिकाओं

प्रतीकात्मक छवि

जरूरी और उपयोगी है संपादकीय कर्म की चुनौतियों पर प्रशिक्षण और संपादकों के बीच आपसी विमर्श – डॉ. शैलेश शुक्ला

Spread the love

Spread the love Print 🖨 PDF 📄 eBook 📱 जरूरी और उपयोगी है संपादकीय कर्म की चुनौतियों पर प्रशिक्षण और संपादकों के

Leave a Comment

error: Content is protected !!