आज है मकर संक्रान्ति
सूर्य देव हुए उत्तरायण
लेकर गुनगुनी धूप और
ऋतु परिवर्तन की तरंग।
वसुधा ने फैलाई प्यारी मुस्कान
ओढ़ सुरमई बासंती परिधान
लिए सरसो की भीनी भीनी सुगंध
लिए लोहड़ी, पोंगल और पतंग।
संग लिए तिल की लड्डुओं की मिठास
साथ मे लिए कई प्राचीन इतिहास
जुड़ी है इससे दक्ष पुत्री सती की कहानी
भस्म कर दी थी जिसे दक्ष की अहम यज्ञाग्नि।
जलाई जाती उपले और लकड़ी
भेजी जाती बेटी घर कपड़े और रेवड़ी।
कर स्नान चढ़ाई जाती तिल और चिवड़ी
देते दान और बाटी जाती खिचड़ी।
होती आराधना प्रकृति के वरदानों की
होती पूजा वर्षा धूप और बैल जोड़ो की
होती यह नव फसलों का शस्योत्सव
मनाई जाती सुख और संपन्नता का उत्सव।
सच है खुशियों की बहार है आयी
प्रकृति की आशीर्वाद है लायी
आग की खुशनुमा आंच है आयी
समृद्धि की मिठास है लायी।
Last Updated on January 23, 2021 by sheetal.phy14
- शीतल साहू
- व्याख्याता
- विवेकानन्द विद्यापीठ रायपुर
- [email protected]
- विवेकानंद विद्यापीठ कोटा रायपुर छत्तीसगढ़ 492010







