न्यू मीडिया में हिन्दी भाषा, साहित्य एवं शोध को समर्पित अव्यावसायिक अकादमिक अभिक्रम

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

सृजन ऑस्ट्रेलिया | SRIJAN AUSTRALIA

विक्टोरिया, ऑस्ट्रेलिया से प्रकाशित, विशेषज्ञों द्वारा समीक्षित, बहुविषयक अंतर्राष्ट्रीय ई-पत्रिका

A Multidisciplinary Peer Reviewed International E-Journal Published from, Victoria, Australia

डॉ. शैलेश शुक्ला

सुप्रसिद्ध कवि, न्यू मीडिया विशेषज्ञ एवं
प्रधान संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

श्रीमती पूनम चतुर्वेदी शुक्ला

सुप्रसिद्ध चित्रकार, समाजसेवी एवं
मुख्य संपादक, सृजन ऑस्ट्रेलिया

प्रेम

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     प्रेम

 

माँ-बाप का प्रेम

जग में सबसे अनमोल

बच्चों की छोटी छोटी खुशियों में

ढूँढें जो अपनी ख़ुशी

उनकी खुशियों के लिए छोड़ दें

जो अपनी सारी खुशियां।

 

कभी बन जाते गुरु हमारे

कभी बन जाएँ दोस्त

अच्छे बुरे का पाठ सिखाते

दुनिया की बुरी नज़र से हमें बचाते।

 

प्रेम का मतलब हमें सिखलाते

अपनेपन का एहसास करवाते

दूर रहने पर भी

जो हर दम रहते

पास हमारे।

 

बिना कुछ बोले

मन की बात समझ लेते

रिश्तों की मजबूती का

राज हमें बतलाते।

 

दर्द में देख हमें

आँसू उनकी आंखों से बहें

बावजूद मुश्किल से लड़ना सिखलाते

ख़ुद को भूल

ध्यान हमारा रखते

जल्दी हो जाऊं ठीक

प्रार्थना ईश्वर से करते

देख यह त्याग

प्रेम से साक्षात हम होते…

समझ आता बिना प्रेम

जीवन हमारा निरर्थक

जैसे बिन पानी मछली का जीवन।

 

स्वार्थ से ऊपर है प्रेम

जीवन का आधार है प्रेम

नित् नित् बढ़ता ही जाए

ऐसा स्पर्श है प्रेम…

सबसे करो प्रेम

ऐसा पाठ वह हमें

  सिखलाते।

 

…जीवन का अस्तित्व ही

जुड़ा प्रेम से

प्रेम से ही दिल

जीता जा सकता सबका

जब आपके पास शेष

कुछ नहीं बचता

ऐसे कठिन समय में

जो आस जगा दे

ऐसा, माँ-बाप का अनमोल प्रेम!

हम पढ़ -लिख कर

कुछ बन पाएं

…जीवन में

खानी न पड़े ठोकर

बस इतनी सी ख्वाहिश उनकी

ऐसा, माँ-बाप का प्रेम!

 

    स्वरचित, मौलिक,  सपना

     

 

 

 

 

Last Updated on October 29, 2020 by sapnanegi68

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