नारी है तू नारी है तू नारी है
दुनियाँ तुझ पे वारी है वारी है।।
तुझसे दुनियाँ सारी है दुनियां सारी है
शक्ति की देवी ममता की माता है जननी नारी है।।
प्रेम सरोवर है क्रोध में अंगारी है
चपला, चचल बाला सुकुमारी है।।
देवो की देवी देव शक्ति अधिस्ठात्री है
रिश्तो की जननी बिटिया दुलारी है।।
छाया माया सत्य सत्कारी है
बहन भगिनी माँ बेटी रिश्तो की
मर्यादा ,गरिमा, महिमा संचारी है।।
छमा ,दया की सागर अमृत की
गागर युग मर्म संसारी है।।
तेरे होने से दुनिया ये सारी है
अन्याय भी सहती समाज का
संयम धैर्य को धारण जग कल्याणी है।।
कोमल हृदय तुम्हारा
पहुचाए कोई हानि अतिसय
करुणा कर दे देती छमा।
यदि कोई मर्यादा की सीमाएं
देता लांघ काल अवतारी है।।
कोमल कली किसलय तेरे
रूप जब कोई करता दुःसाहस
प्रयास पुरुष प्रधान समाज
की कमजोरी लाचारी है।।
बेबस दिन हीन लाचार तू नही
युग पथभ्रष्ट शर्म शर्मिंदा कलंक
कलंकित दुनियाँ सारी है
तेरे संग जब हो अत्याचार
मच जाता हाहाकार तेरी हाय
हद में जल जाता पुरुष प्रधान समाज।।
समाज का अहंकार मृत्यु तू
महाकाल रणचण्डी काली है।।
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
Last Updated on March 8, 2021 by nandlalmanitripathi
- नंन्दलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
- प्राचार्य
- भारतीय जीवन बीमा निगम
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- C-159 दिव्य नगर कॉलोनी पोस्ट-खोराबार जनपद-गोरखपुर -273010 उत्तर प्रदेश भारत







