मेरा देश
कश्मीर से कन्याकुमारी फैला जिसका रूप है,
प्यारा अपना देश है वो प्यारा अपना देश है,
गंगा जी की निर्मल धारा हिमालय की कोख़ है,
सागर से मिलकर जिसका विलय हुआ अवशेष है।
राम की धरती देती हम सबको संदेश है,
कृष्णा की वाणी में जहाँ गीता का उपदेश है,
भक्तों की बातों का जो लेता आदेश है,
अपना भारत मर्यादा पुरुषोत्तम का देश है।
अनगिनत भाषाओं का अनुपम जहाँ मेल है,
अनगिनत संस्कृतियों का छाया जहाँ मेल है,
सबकी अपनी जीवनशैली अपना परिवेश है,
रखता अपना प्यारा भारत धर्मो का समावेश है।
विविधिता में एकता जिसका परिवेश है,
राष्ट्रहित में एकजुटता जिसका संदेश है,
दुश्मनों को चने चबवाना जिसका प्रतिशोध है,
अपना प्यारा भारत देशों में अनमोल देश है।
सरिता त्रिपाठी
Last Updated on January 10, 2021 by saritacdri
- सरिता त्रिपाठी
- वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी
- CSIR-CDRI
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